सरायपाली : मनकी में गाजे बाजे के साथ देवी भोजली दाई का विसर्जन

सरायपाली। छत्तीसगढ़ के प्राचीन लोक संस्कृति पारम्परिक तीज त्यौहार हमेशा ही आपसी भाईचारे अटूट प्रेम सौहार्द्र सदभावना और आस्था का संदेश देता है। इसी कड़ी में ग्राम पंचायत तोषगांव के आश्रित ग्राम मनकी में प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी भाद्रपद कृष्ण पक्ष दशमी तिथि से देवी भोजली दाई की ज्योत जंवारा धान ज्यौ गेहूं ज्वार मूंग उड़द जपधान्य आदि का जंवारा थालियों में बों कर हरितालिका तीज व गणेश चतुर्थी तिथि तक इन 11 दिनों तक प्रतिदिन देवी मां भोजली दाई की संध्या आरती सेवा जसगायन कर ग्राम्य देवी देवताओं से विश्व कल्याण सुख समृद्धि धन-धान्य एवं सर्व सिद्धि मनोकामना की पूजा-पाठ गोंडवाना आदिवासी बैगा भूमियां परम्परागत रीति नीति संस्कृति अनुसार किया गया। अंतिम दिवस उपसरपंच श्रीमती मीनाक्षीरमा राजेन्द्र सिंह सिदार के सेवा सहयोग और यज्ञमान फुटबल ताण्डी परिवार द्वारा हवन पूजन कर भोजली दाई का गाजे बाजे के साथ विसर्जन किया गया। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण लोक मान्यता अनुसार इस दिन भोजली अर्थात नये मितानीन संबंध बनाने का भी एक प्राचीन परम्परा प्रचलित है।
























