दुग्ध उत्पादन में महासमुंद की नई पहचान, हजारों परिवारों को मिल रहा लाभ

महासमुंद। प्रदेश सरकार की ग्रामीण आजीविका सशक्तीकरण नीति के तहत महासमुंद जिले में कृषि के साथ पशुपालन को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है। जिले में दुग्ध उत्पादन एवं विपणन लगातार बढ़ रहा है, जिससे हजारों किसान और पशुपालक परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।
पशुधन विकास विभाग के अनुसार जिले में 1 लाख 78 हजार 533 गौवंशीय एवं 12 हजार 776 भैंसवंशीय सहित कुल 1 लाख 91 हजार 309 पशुधन उपलब्ध हैं। वर्तमान में देवभोग दुग्ध महासंघ द्वारा प्रतिदिन लगभग 17 हजार 200 लीटर दूध का क्रय किया जा रहा है। वहीं निजी डेयरियों के माध्यम से भी प्रतिदिन करीब 17 हजार लीटर दूध खरीदा जा रहा है। इस प्रकार जिले से प्रतिदिन लगभग 34 हजार लीटर दूध का विक्रय दुग्ध समितियों के माध्यम से हो रहा है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है।
दुग्ध विपणन को मजबूत बनाने के लिए जिले में पहले से संचालित 131 सक्रिय दुग्ध सहकारी समितियों के अलावा 25 नई समितियों का गठन किया गया है। वर्तमान में कुल 156 सक्रिय समितियां कार्यरत हैं तथा 30 नई समितियां प्रारंभ करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुपालकों को उन्नत हरा चारा उत्पादन और साईलेज निर्माण हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है। अब तक 32 पशुपालकों को रायपुर जिले के सेमरिया स्थित टाँक डेयरी फार्म का भ्रमण कराकर साईलेज निर्माण की तकनीकी जानकारी दी गई है तथा 16 हितग्राहियों को चारा उत्पादन एवं साईलेज निर्माण के लिए अनुदान प्रदान किया गया है। किसानों को नेपियर, बरसीम और अजोला जैसे पौष्टिक हरे चारे के उपयोग के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।
उन्नत नस्ल के दुधारू पशुओं की संख्या बढ़ाने के लिए जिले में कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम भी लगातार संचालित किया जा रहा है। इससे अधिक संख्या में मादा बछियों का उत्पादन संभव हो रहा है और भविष्य में दुग्ध उत्पादन क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।
महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण परिवारों को डेयरी व्यवसाय से जोड़ने के लिए विभिन्न योजनाएं लागू की गई हैं। महिला हितग्राहियों को 50 प्रतिशत अनुदान पर दो-दो गायों का वितरण किया जा रहा है, जिसके तहत अब तक 94 पशुपालकों को लाभ मिल चुका है। इसके अलावा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की योजना के अंतर्गत 50 आदिवासी परिवारों को गाय वितरण कर दुग्ध व्यवसाय से जोड़ने की पहल की जा रही है।
जिले में दुग्ध उत्पादन, विपणन, पशुधन विकास और महिला सशक्तीकरण की दिशा में किए जा रहे इन प्रयासों से डेयरी व्यवसाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान कर रहा है।































