छत्तीसगढ़

सरायपाली: अंचल के अनाथ बहन- भाई की थाना प्रभारी ने खुदा बन जिंदगी संवार दी

सरायपाली (काकाखबरीलाल). जिसका कोई नहीं उसका तो खुदा है यारों… 90 के दशक का यह मशहूर गाना आज भी गाहे-बगाहे सुनाई पड़ जाता है. लेकिन यह गाना हकीकत में अनाथ बहन-भाई पद्मनी सांड और बालकिशन सांड पर सटिक साबित होती है, जिनके लिए सराईपाली थाना प्रभारी आशीष वासनिक वाकई में खुदा बन जिंदगी संवार दिए.

महासमुंद जिले के सराईपाली थाना क्षेत्र के किसली गांव में रहने वाली 22 साल की पद्मनी सांड अपने 19 वर्षीय भाई बालकिशन के साथ सिर पर बिना छत के जैसे-तैसे गुजारा कर रही थी. दोनों किसी के भी घर के बाहर, टपरी में जहां छांव मिली, थोड़ा सुकून मिला वहीं सो जाते थे. जैसे-तैसे खाने-पीने की व्यवस्था कर काम चला लेते थे. लेकिन रोज-रोज की मुफलिसी से परेशान होकर एक दिन थाने पहुंचकर थानेदार आशीष वासनिक से नौकरी दिलाने की गुजारिश की.

थानेदार ने भाई-बहन की विपरित परिस्थितियों में भी गलत दिशा में कदम न बढ़ाते हुए ईमानदारी के साथ गुजर-बसर करने की इच्छा का सिर-आंखों पर लिया और संपर्क वाले थोक कपड़ा व्यवसायी को फोन लगाया. व्यवसायी ने भी सह्रदयता दिखाते हुए पद्मनी को 4 हजार रुपए और बालकिशन को 5 हजार रुपए की नौकरी पर रख लिया, इसके साथ रात को सुकून के साथ सोने के लिए चाल में रहने के लिए जगह भी मुहैया करा दी है.

माता-पिता के जाने के बाद पहली बार अपने प्रति किसी भी शख्स की सह्रदयता देख भाई-बहन भावविभोर हो गए, और उन्होंने रोते हुए थाना प्रभारी आशीष वासनिक का दिल से आभार जताया. साथ ही न केवल थानेदार की बल्कि व्यवसायी की उम्मीदों पर खरा उतरने का भरोसा दिलाया.

 

बच्चों के लिए जीवन आसान करने वाले थाना प्रभारी आशीष वासनिक ने कहा कि पुलिस का काम कानून-व्यवस्था बरकरार रखना तो है ही, लेकिन सामुदायिक पुलिसिंग के जरिए हम लोगों के जीवन में भी बदलाव लाने की कोशिश करते हैं. पद्मनी और बालकिशन ने विपरित परिस्थितियों में भी गलत रास्ते पर नहीं चले यह महत्वपूर्ण है. हमने इसी बात को ध्यान में रखते हुए उनकी बेहतरी के लिए छोटा सा प्रयास किया है.

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छत्तरसिंग पटेल

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