अभिमन्यु की कहानी से बताया कैसे जरूरी है गर्भस्थ शिशु के मानसिक विकास के लिए संस्कार

– इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ में माता एवं गर्भस्थ शिशु को संगीत के माध्यम से मानसिक एवं शारीरिक रूप से मजबूत बनाने हो रहा कार्य
– राज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन पटेल की संकल्पना पर हो रहा काम, राज्यपाल ने की तारीफ कहा – शिशुओं के विकास के लिए अभिभावकों का कार्य जन्म से नहीं अपितु गर्भावस्था से ही शुरू हो
काकाखबरीलाल :> इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय में पहुंची प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन पटेल ने कहा कि शिशु के विकास के लिए उसके 9 महीने सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं जब वो गर्भ में होता है। अधिकतर मामलों में अभिभावक यह समय गंवा देते हैं जबकि यह समय संस्कार देने एवं शारीरिक विकास के दृष्टिकोण से सर्वाधिक महत्वपूर्ण होता है। श्रीमती पटेल ने कहा कि महाभारत में अभिमन्यु की कहानी मिलती है जिसे महाभारत के युद्ध के लिए तैयार करने उसके पिता ने गर्भावस्था की दौरान ही उसकी माता सुभद्रा को चक्रव्यूह भेदन की विद्या सिखाई थी। खैरागढ़ में श्रीमती पटेल उन गर्भवती माताओं से मिलीं जो संगीत सीख रही हैं सुन रही हैं ताकि उनके गर्भस्थ शिशुओं को इसका अच्छा लाभ मिले। इस दौरान कुलपति श्रीमती मांडवी सिंह एवं कलेक्टर श्री भीम सिंह भी उपस्थित थे। श्रीमती पटेल ने कहा कि परंपरा द्वारा हमें अ˜ुत ज्ञान मिला है लेकिन आधुनिक काल में हम उसे अक्सर व्यवहार में नहीं ला पाते। अभी विदेशों में भी और हमारे देश में भी रिसर्च हुई जिसमें पाया गया कि माता द्वारा गर्भावस्था के दौरान किए गए व्यवहार का असर शिशु पर पड़ता है। उदाहरण के लिए यदि मां कोई डरावनी फिल्म देखे तो गर्भस्थ शिशु के भीतर भी हलचल महसूस की गई। इन सबको देखते हुए बहुत आवश्यक है कि मां गर्भावस्था के दौरान शांत एवं खुश रहे। खैरागढ़ विश्वविद्यालय में महिलाएं इस म्यूजिक थैरेपी को अपना रही है। यह बहुत अच्छा लग रहा है। महिलाओं ने अपने अनुभव भी राज्यपाल से साझा किए। उन्होंने बताया कि पहले वे लय और ताल नहीं जानती थीं अब वे इसमें पारंगत हो गई है। एक गहरा सुकून संगीत सुनने और सीखने से मिलता है। हमारे पति भी खुश हैं जब हम उन्हें बताते हैं कि ऐसा करने से हमारा आने वाला शिशु मानसिक रूप से अधिक सुदृढ़ होगा। राज्यपाल ने उन्हें सलाह दी कि शिशु के मानसिक विकास के लिए आप अच्छी कहानी पढ़िये, संगीत सुनिये और शारीरिक विकास के लिए खूब पौष्टिक खाना खाइये। साथ ही प्राणायाम एवं आसन भी कीजिए। कई तरह से ऐसे आसन हैं जिनमें गर्भावस्था में प्रसव पीड़ा कम महसूस होती है और आसानी से शिशु का जन्म होती है।
अमलीपारा में आंगनबाड़ी पहुंची, स्कूल में बच्चों से की बातचीत –
राज्यपाल ने खैरागढ़ में ही अमलीपारा की आंगनबाड़ी और स्कूल का निरीक्षण किया। बच्चों से बातचीत कर राज्यपाल बहुत खुश हुई। कलेक्टर श्री भीम सिंह ने बताया कि जिले में संवरता बचपन अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में सरपंचों द्वारा कुपोषित बच्चों को दूध वितरण कराया जाता है। अभियान आरंभ होने के पश्चात कुपोषण दूर करने में बड़ी मदद मिली है। स्कूली बच्चों ने राज्यपाल को फर्राटे से पहाड़ा सुनाया जिससे वे काफी प्रसन्न हुई और इन बच्चों को उवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
देखा विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों का सृजन –
श्रीमती पटेल ने विश्वविद्यालय परिसर का निरीक्षण की और संगीत सीख रहे, मूर्तिकला कर रहे और स्केच बना रहे छात्र-छात्राओं से मिलीं। जगरगुंडा से आए कांताराम कोर्राम के पेंटिंग को देखकर उन्होंने इसका अर्थ पूछा और यह भी जानना चाहा कि इतनी दूर खैरागढ़ तक कैसे पहुंच गए। कांताराम ने बताया कि सीखने की ललक उन्हें यहां तक लाई है। उन्होंने कहा कि कला हमारी भीतरी संवेदनशीलता को बढ़ाती है और यहां से निकले छात्र-छात्रा अपने परिवेश को और सुंदर और रंगीन करेंगे।
विद्यार्थियों को दिया संबोधन, कहा यूनिवर्सिटी कैंपस से आगे शहर में भी निकलो, अपने कला के रंग दिखाओ, अपना हुनर शहर के लोगों को दिखाओ –
राज्यपाल ने अंत में दरबार हॉल में विद्यार्थियों को अपना संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि पूरे कैंपस में मैं घूमी। मैंने देखा कि आपके भीतर प्रतिभा का विस्फोट हो रहा है। इस कैंपस में आपकी सृजनशीलता पूरी समृद्धि के साथ निखर रही है। इसे यहीं तक सीमित न रखिये। किसी दिन शहर में अपनी कूची के साथ निकलिये। शहर वाले भी आपकी प्रतिभा देखेंगे। जो लोग गायन से जुड़े लोग हैं वे अपना शो शहर में रखिये। प्रतिभा का निरंतर सार्वजनिक प्रदर्शन आवश्यक है यह सृजनशीलता खुद के लिए भी और पूरे समाज के लिए भी उपयोगी होती है। उन्होंने कहा कि आप लोग अच्छे इंसान बनिये, आप लोग गोल्ड मेडल के पीछे मत भागिए, आप अच्छे इंसान बनिये, सृजनशील इंसान बनिये।
बिहान की महिलाओं से भी संवाद –
राज्यपाल ने बिहान की महिलाओं से भी संवाद किया। बिहान की महिलाओं ने बताया कि कैसे उन्होंने छोटी सी शुरूआत की थी और आज बेहतर जिंदगी का उनका सपना पूरा हो रहा है। ग्राम संडी की अंबिका वर्मा ने बताया कि उनके समूह ने बिहान के माध्यम से पांच सिलाई मशीन ली, फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा, अब कई तरह के कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इससे आर्थिक स्थिति सुधरी और अब उनका बेटा नवोदय में पढ़ता है बिटिया ने होम साइंस में 91 प्रतिशत अंक हासिल किया। गांव का काम करने में अच्छा लगता है। कलेक्टर श्री भीम सिंह ने बताया कि बिहान की महिलाओं से रिकवरी दर 99 प्रतिशत है। इन्होंने आर्थिक स्वावलंबन के क्षेत्र में मिसाल कायम की है। राज्यपाल से प्रधानमंत्री आवास, मुद्रा तथा सौभाग्य योजना के हितग्राहियों ने भी बातचीत की।




























