अभी भी कहीं-कहीं हाथ से धान कटाई कर बीड़ा बना रहे हैं किसान…जहां हारवेस्टर नही पहुंच रहा है वहां किसानों को हो रही है परेशानी

काकाखबरीलाल,सरायपाली। मशीन से धान कटाई होने के बावजूद अभी भी किसान हाथ से कटाई कर धान का बीड़ा बना रहे हैं. जहां हारवेस्टर प्रवेश नही कर पाता वहां किसानों को मजदूरों की सहायता लेकर धान कटाई करनी पड़ रही है. इन दिनों कई खेतों में धान का बीड़ा देखने को मिल सकता है. हालांकि इस तरह का नजारा हारवेस्टर के आ जाने के बाद काफी कम हो गया है. जिन खेतों में पर्याप्त नमी है ऐसे किसान अभी भी स्वयं या मजदूरों की सहायता से धान कटाई करने में व्यस्त हैं. हारवेस्टर से धान कटाई किए जाने से उसके पुआल को खलिहान तक किसान नही ला पाते, लेकिन हाथ से कटाई होने के बाद इसकी मिंजाई कर पुआल को निश्चित जगह में रखते हैं. मशीन के खेतों तक प्रवेश नही करने से भी किसानों को परेशानी हो रही है.
विगत कई वर्षों से धान कटाई हेतु हारवेस्टर के बढ़ते उपयोग से किसानों को बहुत अधिक सुविधा हो रही है. दिनों दिन हारवेस्टर की संख्या भी गांव में बढ़ रही है. आलम यह है कि प्रत्येक गांव में अब एक दो हारवेस्टर मौजूद है. एक तो इससे समय भी बहुत कम लग रहा है वहीं धान मिजाई करने का भी झंझट नही है. किसान कटाई के बाद कु छ दिन सूखाकर उसे बेचने हेतु उपार्जन केन्द्रों में लाते हैं. परंतु अभी भी क्षेत्र के कई गांव ऐसे हैं जहां खेतों में इस समय में भी पर्याप्त नमी होने के कारण हारवेस्टर तक नही पहुÞंच रहा है. ऐसे जगहों में मजदूरों की सहायता लेकर धान कटाई की जा रही है. इसमें मिजाई करने के बाद उसके पुआल को मवेशियों के लिए सुरक्षित रखने में सुविधा हो रही है. जबकि हारवेस्टर से काटने के बाद पुआल को किसान घर तक लाने में टाल मटोल करते हैं धीरे से खेतों में पड़े पुआल भी बेकार हो जाता है. अधिकतर छोटे खेत जहां हारवेस्टर को मुड़ने में भी मुश्किल होती है ऐसे खेतों क े धान की भी किसान स्वयं कटाई करने में लगे हुए हैं.
धान कटाई के लिए मजदूरों को नही मिल रहा है काम
धान कटाई के लिए हारवेस्टर के बढ़ते उपयोग से मजदूरों को काम नही मिल रहा है. विगत 10-15 वर्ष पूर्व इस क्षेत्र के किसान मजदूरों की सहायता से ही धान कटाई करते थे अब वे मशीन का उपयोग कर रहे हैं. ऐसे में धान बोआई से लेकर फसल के कटने तक मजदूरों को काम मिल जाता था. अब वे खाली बैठे हुए हैं खासकर धान कटाई के लिए घर के पुरूष वर्ग के अलावा महिला मजदूर भी काम में लगते थे उनके लिए भी अब धान कटाई का काम नही मिल रहा है.



























