
नवा चुनाव म नवा नेता,
निहर निहर पांव तोर परही।
सबो दुख ल तोर हरहुं कहिके,
दुनिया भर ल अमरही।
पासा तुरते पलट जाथे,
मनखे ल बेंदरा नाच नचाही।
एक ठिन कागजी बुता बर,
धंव धंव अपने पांव परवाही।
आर्टी पार्टी झन देख संगी,
बने अउ गिनहा ल जान ले।
उपर मीठ तरी करू कस्सा ल,
बने टमड़ के पहिचान ले।
बने मनखे बइठे ठेलहा,
गिनहा मन करय राज हे।
गरीबेच मनके मरना होथे,
जइसे मुर्दा ल चोचमत बाज हे।
सोंच समझ ले घेरी बेरी,
सत्ता ल देना हे ओकरे हाथ में।
काम बुता ठोसलगहा रहय,
लबारी झिन होय जेकर बात में।
तेकरे सेतिन कहिथंव बहिनी
जागरूक होजा अपन मत ले।
बुता ल थोरकिन छोड़के,
मतदान करे बर जा फट ले।
✍️नर्मदा सेवक दीवान “नैना”
सुकुलबाय (सिरपुर) महासमुंद छ.ग.
AD#1



























