छत्तीसगढ़

मृतकों की आस्थियां लांकर में कैद… इंतज़ार है उनको विसर्जन की पढ़े पुरी खबर

(रायपुर काकाखबरीलाल).

मोक्ष यानी दुनिया से मुक्ति… पर आज मोक्ष भी लॉकडाउन में फंस गया है। जिन लोगों की मृत्यु हाल ही में हुइ हैं, परिजनों ने उनकी अस्थियां शवगृह के लॉकर में रखवा दी हैं। लॉकडाउन खुलने के बाद इन्हें गंगाजी में विसर्जित किया जाएगा। श्राद्ध कर्म में और भी कई बड़े बदलाव हाल के दिनों में देखने मिले हैं। जैसे 13 दिन में कराया जाने वाला ब्राह्मण भोज अब 4 से 6 माह के लिए टाल दिया गया है। दरअसल, लॉकडाउन ने परस्थितियां ही ऐसी बना दी हैं कि अधिकतम 10 दिन में विसर्जित होने वाली अस्थियां भी 2-3 हफ्ते से लॉकर में कैद हैं। परिजन विवश हैं और इंतजार कर रहे हैं कि कब वे श्राद्ध पूरा करें। शहर के 4 बड़े मुक्तिधामों में कई मृतकाें की अस्थियां रखी गई हैं। बहुत से लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने अस्थियां किसी तालाब या मुक्तिधाम के पास स्थित पेड़ों पर टांग रखा है सिर्फ मारवाड़ी श्मशानघाट, बल्कि शहर के दूसरे मुक्तिधामों में भी हाल के दिनों में कम अंतिम संस्कार हो रहे हैं। बढ़ते कदम संस्था की गाड़ी शवों को मुक्तिधाम तक पहुंचाने के लिए सेवा देती है। संस्था के मैनेजर मनोज आहूजा बताते हैं कि मुक्तिधाम तक शव ले जाने के लिए पहले रोज 7 से 8 कॉल आते थे, लेकिन मार्च से सिर्फ 2 या 3 कॉल ही आ रहे हैं।  अप्रैल में यह आंकड़ा और कम हो गया है। लाॅकडाउन का असर शहर में रोज होने वाली मौतों पर भी दिख रहा है। एक अनुमान के मुताबिक शहर में मृत्यु की संख्या घटकर आधी हो गई है। इसकी 2 मुख्य वजह शराबबंदी और कम सड़क हादसे हैं। मारवाड़ी श्मशानघाट की कमला सारथी बताती हैं कि फरवरी माह में 109 और मार्च में 105 लोगों का अंतिम संस्कार किया गया था। वहीं अप्रैल के 11 दिनों में 25 लोगों का अंतिम संस्कार हुआ। 
सीमित लोगों के बीच सारे कर्म संपन्न कराए जा रहे हैं। उसके बाद अस्थियां महादेवघाट में खारुन नदी में विसर्जित कर दी जा रहीं हैं। खारुन नदी शिवनाथ से मिलती है और शिवनाथ महानदी से। महानदी को छत्तीसगढ़ की गंगा भी कहा जाता है। लोग वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अस्थि विसर्जन के लिए प्रयागराज जाने के बजाय महादेवघाट जा रहे हैं।

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छत्तरसिंग पटेल

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