सहायक शिक्षक राजेश प्रधान के विरुद्ध की गई विभागीय जांच एवं दंड आदेश के संबंध में हुआ अपील

काकाखबरीलाल@सरायपाली। “सहायक शिक्षक राजेश प्रधान के विरुद्ध की गई विभागीय कार्यवाही के संदर्भ में यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि आरोपित जांच में प्रस्तुत किसी भी पोस्ट या सामग्री में किसी कंपनी का नाम अथवा प्रचार-प्रसार नहीं किया गया था। जांच की संपूर्ण प्रक्रिया में ऐसा कोई ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं है जिससे यह सिद्ध हो सके कि संबंधित पोस्ट से विभागीय आचरण नियमों का उल्लंघन हुआ है।
इसके बावजूद, बिना किसी कारण बताओ सूचना (Show Cause Notice) या पूर्व सूचना दिए अचानक दिनांक 08 अगस्त 2025 को तीन सदस्यीय समिति गठित कर जांच की गई। जांच के दौरान शिकायतकर्ता को भी मौके पर बुलाया गया, जो कि एक निष्पक्ष जांच की भावना के विपरीत है।” उक्त सारी बातें कहना है राजेश प्रधान का
जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं निष्पक्षता बनाए रखने हेतु राजेश प्रधान द्वारा जांच अधिकारी को बदलने के लिए विधिवत आवेदन प्रस्तुत किया गया था, किंतु उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई और वही जांच अधिकारी जांच प्रक्रिया में बने रहे। इससे जांच की निष्पक्षता पर स्वाभाविक रूप से प्रश्नचिन्ह उत्पन्न होता है।
जांच में किसी प्रकार का ठोस आरोप प्रमाणित न होने के बावजूद, राजेश प्रधान के विरुद्ध “असंचयी प्रभाव (With Cumulative Effect)” से दो वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने का दंड दिया गया है। यह दंड न केवल गंभीर दंड (Major Penalty) की श्रेणी में आता है, बल्कि उनके भविष्य के वेतनमान एवं कैरियर पर स्थायी प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
यह दंडादेश न्यायोचित प्रक्रिया (Natural Justice) और सेवा नियमों में वर्णित अनुशासनात्मक प्रक्रिया दोनों के अनुरूप नहीं है।
उपरोक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, राजेश प्रधान ने इस आदेश से असंतुष्ट होकर उच्च कार्यालय में अपील प्रस्तुत करने की बात कही है, ताकि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष पुनः समीक्षा की जा सके और उनके विरुद्ध जारी दंड आदेश को निरस्त किया जा सके।



























