CHANDRAYAN 3 : सेजेस सरायपाली में बीईओ सहित पालकों,शिक्षकों,विद्यार्थियों ने देखा चंद्रयान – 3 की सफल लैंडिंग


सरायपाली@काकाखबरीलाल। स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम उत्कृष्ठ विद्यालय सरायपाली में चंद्रयान-3 की लैंडिंग को देखने हेतु शाला परिसर में प्रोजेक्टर,एलईडी आदि डिजीटल डिवाइस बीईओ प्रकाशचंद्र मांझी के निर्देशन एवं प्रभारी प्राचार्य लता साहू एवं कार्यक्रम प्रभारी व्याख्याता प्रदीप नारायण सेठ के संयुक्त मार्गदर्शन/नेतृत्व में इस महत्वपूर्ण पल को विद्यार्थियों को लाइव दिखाने की उत्तम व्यवस्था,तकनीकी उपकरणों की उपलब्धता संस्था के कम्प्यूटर लैब एवं लाइब्रेरी में सुनिश्चित किया गया। 
उत्साह,गर्व,आत्मविश्वास और बेचैनी,उम्मीदों के बीच 40 दिन बाद चंद्रयान – 3 की सफल लैंडिंग/ मंजिल तक पहुंच को देखने सेजेस में विद्यार्थियों – शिक्षकों और पालकों की भीड़ उमड़ पड़ी। चंद्रयान – 3 की लैंडिंग अत्यन्त रोमांचित, अविस्मरणीय पल रहा क्योंकि चंद्रयान 3 के माध्यम से चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला पहला देश होने,एक नई मिशाल कायम करने का गौरव भारत को प्राप्त हुआ। विद्यार्थियों के साथ – साथ बीईओ प्रकाशचंद्र मांझी,एबीईओ जितेन्द्र रावल,पालक समिति अध्यक्ष कमल पटेल,उपाध्यक्ष कमल किशोर अग्रवाल,डॉ आशीष दास,गोवर्धन पंडा,व्याख्याता जोगीलाल पटेल,महेश कुमार नायक,प्रदीप नारायण सेठ,नरेश पटेल,मनोज पटेल,प्रवीण तिवारी,मीना एस.प्रकाश,ज्योति सलूजा,रेखा पुरोहित,दिनेश कुमार कर,हरिश चौधरी,विनोद कुमार चौधरी, प्रधान पाठक यशवंत कुमार चौधरी,गजानंद प्रधान,अक्षय कुमार भोई,हिमाद्री प्रधान,नेहा दास,शिवेन्द्र सिंह सोनवानी,केशवप्रसाद चौहान,घसियाराम चौहान आदि की सक्रिय उपस्थिति रही।बीईओ प्रकाशचंद्र मांझी ने बताया कि चंद्रयान 3 की सफल लैंडिंग पूरे देश की जनता का विश्वास के साथ सतत क्रियाशील इसरो के वैज्ञानिकों की टीम का लगन, कड़ी मेहनत का सफल,सराहनीय परिणाम है जो पुरे भारतवासियों के लिए गर्व की बात है। व्याख्याता प्रदीप नारायण सेठ ने कहा कि भारत का तीसरा लूनर मिशन चंद्रयान 3 बुधवार को सफलतापूर्वक चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग किया और देश के लिए एक इतिहास रचने में कामयाबी हासिल किया जिससे पूरा देश गौरांवित है। इस अद्भुत पल को विद्यार्थियों,पालकों,शिक्षकों ने एकटक अवलोकन किया, उक्त सम्पूर्ण कार्यक्रम के संचालन एंव कियान्वयन में स्कूल के श्री पी.एन. सेठ सर का विशेष योगदान रहा है।


























