छत्तीसगढ़

खिलौने से प्रेरणा लेकर प्रथमजीत बने पायलट

आया रे खिलौने वाला खेल खिलौने लेके आया रे… अपने दौर में हर किसी ने यह गाना सुना होगा। आज आपको खिलौने में हवाई जहाज इकट्ठा करने वाले उस युवक की सक्सेस स्टोरी बता रहे हैं जिसे अमरीका में प्राइवेट पायलट का लाइसेंस मिल गया है। हम बात कर रहे हैं महावीर नगर के 19 वर्षीय प्रथमजीत सिंह हुंदल की। उन्हें अमरीका के फ्लोरिडा से प्राइवेट पायलट लाइसेंस मिल गया है। इस साल वे कमर्शियल पायलेट भी लाइसेंस मिल जाएगा। इसके बाद वे भारत में डीजीसीए एग्जाम देकर यहां का लाइसेंस हासिल करेंगे। रायपुर से बारहवीं तक की पढ़ाई के बाद प्रथमजीत ने जीएनएफसीएस मसूरी में दाखिला लिया। इसके बाद पायलट ट्रेनिंग सेंटर होमस्टेड फ्लोरिडा में पढ़ाई की। प्रथमजीत के पिता विक्रम सिंह हुंदल ने बताया, जब यह चौथी क्लास में था तभी कह दिया था कि प्लेन उड़ाउंगा। उस वक्त तो हम मजाक में ही लेते थे लेकिन जैसे-जैसे बड़ा हुआ इसके इरादे समझ आने लगे। फिर हम भी उसे प्रेरित करने लगे। मैंने तो एक बार यहां तक कह दिया था कि मैं तो उस दिन का इंतजार कर रहा हूं जब मेरे कानों में यह शब्द गूजेंगे- इस विमान के प्रमुख कप्तान हैं प्रथमजीत सिहं हुंदल।विक्रम ने बताया, प्रथमजीत का सबसे ज्यादा ख्याल इसकी मम्मी माने सिंह हुंदल ने रखा है। वह उसे उसके सपने को याद दिलाती रहती। जब कभी प्रथमजीत किसी बात को लेकर निराश होता या फोकस्ड नहीं होता तो वह कहती तेरे को पायलट नहीं बनना है क्या? बेटा तुम्हें पायलट बननाा है। अपना और तुम्हारे पापा का सपना पूरा करना है। यह सुनकर प्रथमजीत सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर हो जाता और सिर्फ पढ़ाई में फोकस्ड होता। हमने उसे हमेशा सेफ रखा। उसे कहते रहते थे कि ज्यादा दोस्ती-यारी में मत पडऩा। धोखे से भी कोई केस हो गया तो तुम्हारा सपना अधूरा रह जाएगा।इस साल ही प्रथमजीत को हर तरह के विमान उड़ाने का लाइसेंस मिल जाएगा। उनकी सोच है कि भारत में ही प्लेन उड़ाए। आमतौर पर युवा विदेशों के लिए आकर्षित होते हैं लेकिन प्रथमजीत के लिए स्वदेश में विमान उड़ाना पहली प्राथमिकता।

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छत्तरसिंग पटेल

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