सरायपालीसाहित्य - कविताएं
लाँकडाउन

वो लहर भी था और कहर भी,
चपेट में इसकी गांव भी था और शहर भी |
सरकार करते रह गया लॉक डाउन,
पर भरा अस्पताल भी था और कबर भी ||
कुछ को जल्दी था और कुछ को सबर भी,
लाश था पड़ा पर ना पहुंचा खबर भी |
सरकार करते रह गया लॉकडाउन,
और इंसान को खाना तो दूर ना मिला जहर भी ||
हो रहा था घोटाला बढ़ रहा था कहर,
लूट रहा था गांव पनप रहा था शहर |
सरकार करते रह गया लॉकडाउन,
और वक्त गया था वहीं ठहर ||
मंजिल थी सामने खराब था डगर,
चौपट था राजा अंधेरा था नगर |
सरकार करते रह गया लॉक डाउन,
और जब होश आया तो अमृत भी हो चुका था जहर || ललित कुमार दास पाटसेंद्री,सराईपाली 7000860200
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