रायपुर

कोरोना के कठिन समय में कोविड पॉजिटिव मां के नवजातों को सहेजने, पोसने और उन्हें जिंदगी देने का काम कर रही नर्सें

रायपुर (काकाखबरीलाल). अब भी चलती है जब आंधी कभी गम की, माँ की ममता मुझे बाहों में छुपा लेती है।’ ममता चेहरे नहीं देखती, उसका हर रूप में निखरता है। कोरोना के कठिन समय में मां और ममता का ऐसा ही रूप राजधानी के आंबेडकर अस्पताल में अहसास किया जा सकता है। कोविड पॉजिटिव मां के नवजातों को सहेजने, पोसने और उन्हें जिंदगी देने का काम नर्सें कर रही हैं।

खुद पीपीई किट पहने हुए, पसीने में तरबतर घंटों इन बच्चों की निगरानी करती रहती हैं, ताकि ये नन्ही जान कोरोना से जंग जीत सके। बच्चों को दूध पिलाने, ट्यूब से खाना देने, हर पल उनके ऑक्सीजन लेवल सहित कई चीजों की मॉनिटरिंग वे 24 घंटे करती रहती हैं। आंबेडकर अस्पताल में कोरोना संक्रमित नवजात के लिए स्पेशल कोविड केयर नर्सरी बनाई गई है। इसमें 30 नर्सों की टीम को इसके लिए विशेष परीक्षण दिया गया है। शिफ्ट में उनकी ड्यूटी अलग अलग दिन आंबेडकर अस्पताल और पंडरी जिला चिकित्सालय में लगाई जाती है। उनके साथ ही मॉनिटरिंग के लिए सीनियर डॉक्टर और जूडो की भी टीम होती है, जो उन्हें निर्देशित करती है। स्टाफ नर्स रीना राजपूत बताती हैं, उनकी खुद एक नौ साल की बेटी है। कोविड वार्ड में ड्यूटी के दौरान बेटी को बड़ी दीदी के पास छोड़कर आती हैं। अस्पताल आते_जाते बाहर रोड से ही बेटी को देखती हैं, ताकि संक्रमण का कोई खतरा बेटी को ना हो। वे बताती हैं कि एक बार नाइट शिफ्ट के दौरान कोविड संक्रमित छ: बच्चों को संभालना पड़ा। इनमें से कुछ को हर डेढ़ से दो घंटे में दूध पिलाने की जरूरत पड़ती थी। पीपीई किट के कारण शरीर पूरी तरह से पसीने से भींग चुका था। चार घंटे की मशक्कत के बाद जब सभी बच्चे सो गए तब जाकर वे थोड़ा आराम कर पाईं। कोविड केयर वार्ड में मंजू बघेल, ज्योति राठौड़,नैनी, इंदु धीवर, लता देवांगन सहित कई नर्स हैं, जो निरंतर नवजातों की जीवन रक्षा करने डटी हुई हैं।

मई 2020 से लेकर अब तक यहां 270 कोरोना संक्रमित गर्भवतियों की डिलीवरी की गई। इनमें से 54 बच्चे जन्म के बाद हुए जांच में कोरोना संक्रमित पाए गए। कोविड पॉजिटिव बच्चों का का उपचार आंबेडकर अस्पातल में ही किया जाता है। ऐसे बच्चे जो कोरोना निगेटिव हैं, लेकिन उनकी मां कोरोना पॉजिटिव हैं, उनका उपचार पंडरी जिला चिकित्सालय में किया जाता है। इनके भी विशेष देखभाल का जिम्मा इन नर्स पर ही है। डॉ. अनु प्रसाद बताती हैं, बच्चों को मां से दूर रखना कई बार जरूरी हो जाता है। कुछ बच्चों को ऑक्सीजन सहित अन्य चीजों की जरूरत होती है। इन परिस्थितियों में मां को बच्चे से दूर रखने के लिए मनाना कई बार मुश्किल हो जाता है। वे मिलने की जिद करती हैं। डिस्चार्ज करने के बाद भी बच्चों को फॉलोअप के लिए हर पंद्रह दिनों में बुलाया जाता है।

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छत्तरसिंग पटेल

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