धान खरीदी केंद्र में सेल्समैन नियुक्ति के नाम पर ₹2.50 लाख की रिश्वत मांगने का आरोप, ऑडियो रिकॉर्डिंग के साथ कलेक्टर से हुई शिकायत, बसना तहसील का मामला

• सरकंडा सेवा सहकारी समिति अध्यक्ष पर लगा ढाई लाख रुपये मांगने व धमकी देने का गंभीर आरोप
• पीड़ित ने कलेक्टर व उप पंजीयक सहकारिता को पेन ड्राइव में ऑडियो सबूत सौंपकर बर्खास्तगी की मांग की
• पैसे नहीं देने पर चयन निरस्त करने की दी जा रही थी धमकी, सीएम हेल्पलाइन में भी दर्ज हुई शिकायत
महासमुंद / बसना। जिले की ग्रामीण सेवा साख सहकारी समिति सरकंडा (पंजीयन क्र. 1225) के अंतर्गत धान खरीदी केंद्र टांगापासा (शाखा पिरदा) में विक्रेता (सेल्समैन) पद पर नियुक्ति को लेकर भ्रष्टाचार और भारी भरकम रिश्वतखोरी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। समिति अध्यक्ष पर आवेदक से नौकरी के एवज में 2 लाख 50 हजार रुपये (ढाई लाख रुपये) नकद रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित अभ्यर्थी ने इस मामले की लिखित शिकायत ऑडियो रिकॉर्डिंग साक्ष्य के साथ कलेक्टर महासमुंद एवं उप पंजीयक (सहकारिता विभाग) को सौंपते हुए अध्यक्ष के खिलाफ निष्पक्ष जांच और बर्खास्तगी की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम टांगापासा (तहसील बसना) निवासी दुलेश पटेल (पिता मुरलीधर पटेल) ने ग्रामीण सेवा साख सहकारी समिति सरकंडा द्वारा धान खरीदी केंद्र टांगापासा में रिक्त सेल्समैन/विक्रेता पद हेतु नियमानुसार आवेदन जमा किया था।
आवेदक दुलेश पटेल का आरोप है कि समिति के अध्यक्ष संतोष नायक (निवासी ग्राम अजगरखार) द्वारा उक्त पद पर नियुक्ति देने के एवज में ₹2.50 लाख नगद राशि की मांग की जा रही है। पीड़ित का कहना है कि जब उसने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई, तो अध्यक्ष द्वारा उसकी नियुक्ति निरस्त करने और पद किसी अन्य को दे देने की सीधी धमकी दी गई।
ऑडियो रिकॉर्डिंग बनी अहम सबूत
पीड़ित दुलेश पटेल ने बताया कि समिति अध्यक्ष द्वारा पैसों की मांग और धमकी दिए जाने संबंधी बातचीत को उसने अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया है। शिकायत के साथ इस कॉल रिकॉर्डिंग को पेन ड्राइव में सुरक्षित कर प्रशासनिक अधिकारियों को बतौर साक्ष्य सौंपा गया है। इसके अलावा मामले की शिकायत शासन के सीएम हेल्पलाइन नंबर (1076) पर भी दर्ज कराई गई है।
अध्यक्ष को पद से हटाने व निष्पक्ष जांच की मांग
आवेदक ने कलेक्टर एवं उप पंजीयक को दिए अपने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि सहकारिता के नियमों को ताक पर रखकर नियुक्ति प्रक्रिया में खुलेआम सौदेबाजी की जा रही है, जो पूरी तरह गैरकानूनी एवं भ्रष्टाचार के दायरे में आता है। पीड़ित ने प्रशासन से मांग की है कि:
- इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय व निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- आरोपी समिति अध्यक्ष को तत्काल प्रभाव से पद से बर्खास्त किया जाए।
- साक्ष्यों के आधार पर दोषी के खिलाफ विधि सम्मत ठोस दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जाए।
अब देखना दिलचस्प होगा कि आगे इस मामले में क्या कार्यवाही होती है।
रिपोर्ट – विजय कुमार / राम नायक





























