बर्रा अस्पताल के कूड़ेदान में फेंकी गईं जरूरी दवाएं बीएमओ बेपरवाह, जरूरतमंद फिर रहे मारे मारे

काकाखबरीलाल खरसिया। समुचित स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र ग्राम बर्रा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जरूरी दवाएं कूड़ेदान में फेंक दी गईं, जानकर ताज्जुब होगा कि इन दवाओं में ऐसी दवाएं भी हैं, जिनकी एक्सपायरी होने में अभी 4 से 6 महीने बाकी हैं।
तेज गर्मी और बदलते मौसम में मरीजों की संख्या बढ़ती चली जा रही है, वहीं ओआरएस जैसी जरूरी दवाएं भी कूड़ेदान में फेंक दी गई। एक ओर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने के प्रयास कर रही है, वहीं प्रभारी डॉक्टर्स के द्वारा लापरवाहीयाँ बरती जा रही हैं। जब इस बात की सूचना रविवार को बीएमओ डॉक्टर सुरेश राठिया को दी गई, तो उन्होंने कहा कि मैं शाम तक चेक करवाता हूं। वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों ने कहा कि साहब का फोन आया था दवाओं को उठाकर रख देने की बात कही गई है।
यह तो लापरवाही की हद है
जरूरी दवाएं जो एक्सपायर हुई या नहीं पर जब उन्हें खुले में डाल दिया जाये तो कोई बच्चा या फिर जानवर उसे खा कर परेशानी में आ सकता है। वहीं दवाओं की एक्सपायरी से लगभग 3 माह पहले कैंप आदि लगाकर उन्हें खपाने की व्यवस्था नियमत: की जानी चाहिये। ताज्जुब की बात है कि ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर क्षेत्र में इस तरह की कोई चेकिंग नहीं करते हैं। अगर सरकारी अमला यह सब करने में लापरवाह है तो कम से कम उच्चाधिकारियों को सूचित कर देना चाहिए ताकि अधिक ओपीडी वाले अस्पताल तक यह दवाई पहुंच सकें और जरूरतमंदों को मिल सकें। परंतु इन सभी नियमों को ताक में रखकर गैर वाजिब तरीके से दवाओं को डिस्ट्रॉय करने के बहाने फेंक देना यह तो लापरवाही की चरम सीमा है।
इस लापरवाही की जांच की जा रही है, जांच के बाद उचित कार्यवाही की जावेगी। जिले के सभी बीएमओ को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों में लगातार जांच करते हुए समय से पहले सूचित करें, ताकि दवाओं का दुरुपयोग होने से बचाया जा सके।
– डॉ.एसएन केसरी सीएचएमओ रायगढ़



























