बसना

बसना:ढैंचा की हरी खाद से सुधरेगी मिट्टी की सेहत, 813 किसान अपना रहे टिकाऊ खेती की राह

बसना। राज्य शासन की मंशानुरूप कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह के निर्देशानुसार जिले में कृषि विभाग द्वारा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हरी खाद (ढैंचा) के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत जिले के सभी विकासखंडों में किसानों को हरी खाद अपनाने के लिए प्रेरित किया गया है।

अभियान के अंतर्गत जिले में 376 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 103 क्विंटल ढैंचा बीज का वितरण किया गया है, जिससे 813 किसान हरी खाद तकनीक अपना रहे हैं। कृषि विभाग के मार्गदर्शन में किसानों ने ढैंचा की बुवाई कर फूल आने से पहले उसे खेत में पलट दिया है। इसके सड़ने से बनने वाली जैविक खाद के माध्यम से उसी खेत में धान की खेती की जाएगी।

विकासखंड बसना के ग्राम बड़ेसाजापाली के किसान हिमांशु बंजारे ने 0.80 हेक्टेयर भूमि में ढैंचा की खेती की है। उनका कहना है कि जैविक खेती अपनाने से खेती की लागत कम होने के साथ मिट्टी का स्वास्थ्य भी बेहतर होगा। वहीं पिथौरा विकासखंड के ग्राम कौहाकुड़ा के किसान रूक्मण नायक ने 7 एकड़ तथा बसना के ग्राम भौंरादादर के किसान गोकुल पटेल ने भी अपने खेतों में ढैंचा की हरी खाद फसल की बुवाई की है। किसानों का कहना है कि इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी, भूमि की उर्वराशक्ति बढ़ेगी और खेती की लागत में कमी आएगी।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ढैंचा एक दलहनी हरी खाद फसल है, जो वायुमंडल से नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर मिट्टी में उपलब्ध कराती है। इसके अलावा यह फास्फोरस, जिंक एवं आयरन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने में भी सहायक है। ढैंचा के सड़ने से बनने वाला ह्यूमस मिट्टी को भुरभुरा बनाता है, जिससे हवा और पानी का संचार बेहतर होता है तथा फसलों की जड़ों का विकास और उत्पादन क्षमता बढ़ती है। हरी खाद मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ाकर सिंचाई की आवश्यकता भी कम करती है।

उप संचालक कृषि एफ.आर. कश्यप ने किसानों से अपील की है कि धान सहित अन्य खरीफ फसलों की बुवाई से पहले ढैंचा, सनई अथवा अन्य हरी खाद वाली फसलों का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि हरी खाद अपनाने से रासायनिक उर्वरकों पर होने वाला खर्च कम होता है, मिट्टी की दीर्घकालीन उर्वराशक्ति बनी रहती है तथा पर्यावरण अनुकूल, टिकाऊ और लाभकारी कृषि को बढ़ावा मिलता है।

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