
सरायपाली – बरगढ़ के प्रसिद्ध धनुजात्रा की तर्ज पर सराईपाली नगर में भी इसका मंचन किया जा रहा है। उड़िया संस्कृति के अनुरूप यह पूरी तरह कृष्ण पर आधारित है। कृष्ण जन्म से लेकर कंस वध तक की लीला का मंचन किया जा रहा है। इस क्षेत्र के उड़िया भाषी लोग हजारों की संख्या में देखने के लिए नगर के हाईस्कूल मैदान पहुंच रहे हैं।

धनुजात्रा में पूरे सराईपाली को गोकुल और मथुरा के रूप में मान्य करते हुए रंगमंच के रूप में उपयोग में लाया जा रहा है। जहां कंस नगर के मुख्य मार्ग पर हाथी पर सवार होकर निकलते हैं और मैदान पर जाकर दरबार लगाते हैं। जहां संवादों का प्रस्तुतिकरण देखने लोग उमड़ रहे हैं। इतनी भीड़ कभी गणेश चतुर्थी के दौरान उमड़ती थी, जब रातभर सड़क जाम रहता था लोगों को चलना भी मुश्किल होता था, यही स्थिति आज बनी हुई है।
कृष्ण द्वारा तालाब में प्रतीकात्मक चीरहरण, गोकुल की ग्वालाओं द्वारा मक्खन का वितरण, पूतना का वध, महाराज कंस के नगर भ्रमण के दौरान लोगों को तरह-तरह के दंड प्रतीकात्मक रूप से दिए जा रहे हैं। नाट्य संस्कृति के लौट आने से कलाप्रेमी खुश हैं। पूरे नगर को रंगमंच बनाकर जिस ढंग से प्रस्तुति की जा रही है, इससे लोगों में बेहद उत्साह है।




























