कृषि विभाग के मार्गदर्शन से चमकी किसानों की किस्मत, उड़द खेती बनी लाभ का सौदा

बेमेतरा। कृषि विभाग के मार्गदर्शन, उन्नत बीजों की उपलब्धता और वैज्ञानिक खेती की तकनीकों के प्रभाव से बेमेतरा जिले में ग्रीष्मकालीन उड़द एवं मूंग की खेती किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है। इस वर्ष जिले में ग्रीष्मकालीन दलहन फसलों का रकबा उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। पिछले वर्ष जहां मात्र 285 हेक्टेयर क्षेत्र में उड़द-मूंग की खेती की गई थी, वहीं इस वर्ष यह बढ़कर 1191 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। इनमें लगभग 1000 हेक्टेयर क्षेत्र में 1280 किसानों द्वारा ग्रीष्मकालीन उड़द का प्रदर्शन किया गया है।
विकासखंड साजा के ग्राम गाड़ाभाठा निवासी प्रगतिशील कृषक अमर सिंह साहू ने कृषि विभाग के मार्गदर्शन में पहली बार लगभग 1.5 एकड़ भूमि में ग्रीष्मकालीन उड़द की खेती की। विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए उन्नत बीजों और वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग करते हुए उन्होंने 21 अप्रैल 2026 को कतार पद्धति से बुवाई की। वर्तमान में उनकी फसल उत्कृष्ट स्थिति में है तथा प्रति एकड़ 7 से 8 क्विंटल उत्पादन मिलने की संभावना है।
अमर सिंह साहू ने बताया कि पहले वे केवल परंपरागत फसलों की खेती करते थे, लेकिन कृषि विभाग के प्रदर्शन कार्यक्रम से प्रेरित होकर उन्होंने उड़द की खेती अपनाई। फसल की अच्छी बढ़वार और संभावित उत्पादन को देखते हुए वे भविष्य में अधिक क्षेत्र में दलहन फसलों की खेती करने की योजना बना रहे हैं।
इसी प्रकार ग्राम बिजागोंड के कृषक चंद्रकुमार कुंभकार ने भी पहली बार ग्रीष्मकालीन उड़द का प्रदर्शन लगाया। उन्होंने 12 अप्रैल 2026 को कतार पद्धति से बुवाई की और विभागीय अधिकारियों के तकनीकी मार्गदर्शन का लाभ उठाया। उनकी फसल वर्तमान में स्वस्थ एवं घनी अवस्था में है तथा प्रति एकड़ 8 से 9 क्विंटल उत्पादन मिलने का अनुमान है।
चंद्रकुमार कुंभकार का कहना है कि प्रारंभ में ग्रीष्मकालीन मौसम में उड़द की खेती को लेकर संदेह था, लेकिन कृषि विभाग के सहयोग और सफल परिणामों ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। अब वे अपने गांव के अन्य किसानों को भी दलहन फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ग्रीष्मकालीन उड़द की खेती किसानों को अतिरिक्त आय देने के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य सुधारने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। दलहन फसलें वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती हैं, जिससे आगामी फसलों के लिए भूमि अधिक उपजाऊ बनती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है।
अमर सिंह साहू और चंद्रकुमार कुंभकार जैसे किसानों की सफलता यह साबित करती है कि गुणवत्तायुक्त बीज, वैज्ञानिक तकनीक और समय पर मार्गदर्शन मिलने पर किसान नई फसलों को अपनाकर बेहतर उत्पादन और अधिक आय अर्जित कर सकते हैं। बेमेतरा जिले में ग्रीष्मकालीन उड़द की बढ़ती खेती आत्मनिर्भर कृषि और टिकाऊ खेती की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभर रही है।































