पिथौरा

1000 से अधिक लोगों ने टेलीस्कोप के माध्यम से देखा सुयृग्रहण

(पिथौरा काका खबरीलाल)। पिथौरा . छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा पिथौरा, बसना, सरायपाली एवं महासमुन्द इकाई के संयुक्त तत्वावधान में खेल मैदान पिथौरा में आयोजित सूर्य उत्सव कार्यक्रम के तहत टेलीस्कोप के माध्यम से काफी संख्या में लोगों ने सूर्य ग्रहण को देखा।
सूर्य उत्सव कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विकास खंड शिक्षा अधिकारी केके ठाकुर थे।
अध्यक्षता छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के प्रांतीय उपाध्यक्ष हेमन्त खुटे ने की।
विशेष अतिथि के रूप में इकाई के अध्यक्ष एम डी प्रधान ,अंतर्यामी प्रधान ,संजय श्रीवास्तव तथा बसना इकाई के संयोजक अजय भोई मंचासीन थे।
सूर्य उत्सव कार्यक्रम के खास मौके पर सामान्य जानकारी देते हुए प्रांतीय उपाध्यक्ष हेमन्त खुटे ने कहा कि पिथौरा इकाई छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के बैनर तले विगत कई वर्षों से लोगों में वैज्ञानिक सोच एवं चेतना जागृत करने का कार्य कर रहा है। सूर्य ग्रहण के इस विशेष अवसर पर 26 दिसंबर को कंकणाकार सूर्यग्रहण के अवलोकन हेतु पिथौरा द्वारा टेलिस्कोप की विशेष व्यवस्था की गई है तथा इस कार्यक्रम को सूर्य उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है।
मुख्य अतिथि विकास खंड शिक्षा अधिकारी के के ठाकुर ने कहा कि ग्रहण एक प्राकृतिक परिघटना है और यह सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा के सीधी रेखा में होने और एक की छाया दूसरे पर पड़ने का मामला है।
पिथौरा इकाई के अध्यक्ष एम डी प्रधान ने कहा कि पृथ्वी के चारों ओर घूमते हुए कभी-कभी चंद्रमा की छाया पपृथ्वी पर पड़ती है यह घटना सूर्यग्रहण कहलाती है ।
बसना इकाई के संयोजक , विज्ञान कार्यकर्ता युवा विज्ञानी अजय भोई ने कहा कि वलय कार सूर्यग्रहण देखने का अवसर वर्षों बाद मिला है ।यह एक दुर्लभ संयोग है। कंकणाकार सूर्य सूर्य ग्रहण के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि जब पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी अधिक होने के कारण चंद्रमा की डिस्क सूर्य की डिस्क को पूरी -पूरी ढक नहीं पाती और चंद्रमा की छाया शंकु पृथ्वी तक नही पहुँच पाती तब इस छाया शंकु के विस्तार क्षेत्र में खड़े दर्शक को कंकणाकार सूर्य ग्रहण दिखाई देता है।
शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला के प्रधान पाठक अंतर्यामी प्रधान ने ग्रहण संबंधित अंधविश्वास निर्मूलन के लिए इस जागरूकता अभियान एवं प्रत्यक्ष अवलोकन कार्यक्रम के तहत इस उत्सव की सराहना की । उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन से प्रत्यक्ष अनुभव होते हैं ।मन की शंकाओं का समाधान होता है और सोच में वैज्ञानिकता दृष्टिकोण झलकता है।
विज्ञान सभा के वरिष्ठ सदस्य संजय श्रीवास्तव ने कहा कि सूर्यग्रहण एक प्राकृतिक घटना है इसे कदापि अंधविश्वास से न जोड़ें एवं प्रचलित मान्यताओं का विश्लेषण करते हुए उनके वास्तविकता को समझने का प्रयास करें यही विज्ञान हमें सिखाता है ।
विभिन्न सामाजिक ,शैक्षणिक, , व्यापारिक एवं योग संस्था के पदाधिकारियों ने सूर्य उत्सव के आयोजन में हिस्सा लिया।
स्कूली बच्चों एवं जन समुदाय के लगभग 1000 से अधिक लोगों ने टेलिस्कोप व फिल्टर युक्त चश्मे से सूर्यग्रहण को अवलोकन किया।
इस अवसर पर कल्याण सिंह छाबड़ा, राजेन्द्र सिन्हा, जाकिर क़ुरैशी , नंद किशोर अग्रवाल ,रवि अग्रवाल, डॉ वीरेंद्र प्रजापति, गौरव चंद्राकर ,सुधीर प्रधान ,रोहणी देवांगन, सुनील अग्रवाल ,दिनेश नामदेव,डी एन पटेल, सुमित सिंघल ,डॉ संजय गोयल ,नीलम गोयल , अभिलाषा डडसेना, प्रीति अग्रवाल, तीस्ता खुटे, रक्षा, अन्वेशा अग्रवाल ,मंजू अग्रवाल, श्रेया श्रीवास्तव उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम का संचालन अंतर्यामी प्रधान ने तथा आभार प्रदर्शन डॉ डी एन साहू ने किया ।
कार्यक्रम को सफल बनाने में बीजू पटनायक ,डॉ मृणाल चन्द्रसेन,यशवंत चौधरी ,लोकनाथ पटेल ,मनोज कुमार साहू, ज्ञानेंद्र मारकंडेय, सतीश निषाद, भूषण पटेल का योगदान रहा ।
सूर्योत्सव कार्यक्रम के दरमियान स्थानीय पिथौरा इकाई द्वारा फिल्टर युक्त चश्मा एवं ब्रोशर का निशुल्क वितरण किया गया ।
यह पहला अवसर था जब सूर्य ग्रहण को देखने के लिए गृहणियां काफी संख्या में घर से निकल कर खेल मैदान पहुंचकर सूर्यग्रहण को टेलिस्कोप के जरिये देखा तथा अपनी जिज्ञासाओं को प्रश्न कर शांत किया। विज्ञान सभा के सदस्यों ने लोगों के पूछे गए सवालों का जवाब देकर उन्हें संतुष्ट किया।

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छत्तरसिंग पटेल

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