बसना:सरस मेलों में छाया भंवरपुर की महिलाओं का हुनर, 7.07 लाख के उत्पाद बेचकर बनीं आत्मनिर्भर

बसना। कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहकर परिवार की जिम्मेदारियां निभाने वाली ग्रामीण महिलाएं अब अपने हुनर और मेहनत से आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर महासमुंद जिले के बसना विकासखंड के ग्राम भंवरपुर की नया सवेरा महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं ने पारंपरिक कौशल को आजीविका का साधन बनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है।
समूह की महिलाओं द्वारा कोषा साड़ी, शॉल, दुपट्टा, गमछा सहित विभिन्न उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। बिहान योजना के तहत जनपद पंचायत बसना के माध्यम से समूह को चक्रिय निधि का लाभ मिला, जिससे महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों को गति मिली। समूह ने सामूहिक कार्ययोजना तैयार कर अपने पारंपरिक हुनर को व्यवस्थित व्यवसाय का रूप दिया।
बिहान के माध्यम से समूह का चिन्हांकन कर विभिन्न स्थानों पर आयोजित सरस मेलों में स्टॉल उपलब्ध कराया गया। समूह की महिलाओं ने भिलाई, रायपुर, दिल्ली, विशाखापट्टनम और नोएडा में आयोजित सरस मेलों में अपने उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री की। भिलाई में 1 लाख 25 हजार रुपए, रायपुर में 1 लाख 1 हजार रुपए, दिल्ली में 78 हजार रुपए, विशाखापट्टनम में 82 हजार 500 रुपए तथा नोएडा में 3 लाख 21 हजार रुपए के उत्पादों की बिक्री हुई। इस तरह पांचों मेलों में समूह ने कुल 7 लाख 7 हजार 500 रुपए का कारोबार किया।
सरस मेलों में मिली सफलता से समूह की महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है। अब वे स्थानीय बाजार में भी अपने उत्पादों का विक्रय कर रही हैं। बिहान के सहयोग और बाजार उपलब्धता से महिलाओं को निरंतर आय का स्रोत मिला है। समूह की यह पहल ग्रामीण क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायक मिसाल बन रही है।





























