बिहान ने दिखाई राह, सीमेंट ईंट कारोबार से लखपति बनीं समसाद

सुकमा। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़कर सुकमा जिले के पूर्व नक्सल प्रभावित ग्राम एर्राबोर की श्रीमती सोयम समसाद ने आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की है। कभी परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली समसाद आज सीमेंट ईंट निर्माण का सफल व्यवसाय संचालित कर रही हैं। विभिन्न आजीविका गतिविधियों से उनकी वार्षिक आय बढ़कर 1 लाख 50 हजार 468 रुपये पहुंच गई है, जिसके चलते उन्हें ‘लखपति दीदी’ का दर्जा मिला है।
समसाद वर्ष 2021 में बिहान योजना के ‘प्रयास समूह’ से जुड़ीं। समूह की बैठकों, बचत और ऋण व्यवस्था से उनका आत्मविश्वास बढ़ा। समूह को मिली चक्रीय निधि और सामुदायिक निवेश निधि से 60 हजार रुपये की सहायता प्राप्त कर उन्होंने वर्ष 2023 में हाथ से सीमेंट ईंट बनाने का काम शुरू किया। क्षेत्र में सीमित मांग और अन्य चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कारोबार जारी रखा।
वर्ष 2025-26 में उन्होंने मशीन से सीमेंट ईंट निर्माण शुरू करने का निर्णय लिया। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन और विभागीय अभिसरण से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत ग्रामीण बैंक, दोरनापाल से 5 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। मशीन लगने के बाद उनके व्यवसाय का विस्तार हुआ और उनकी बनाई सीमेंट ईंटों का उपयोग पंचायतों में आवास निर्माण सहित विभिन्न विकास कार्यों में किया जा रहा है। इससे उन्हें प्रतिमाह करीब 8 से 10 हजार रुपये की आय होने लगी।
सीमेंट ईंट व्यवसाय के साथ समसाद वनोपज संग्रहण और कृषि आधारित गतिविधियों से भी आय अर्जित कर रही हैं। उन्होंने इस वित्तीय वर्ष में 32 क्विंटल इमली की खरीदी की, जिससे सीजन में 10 हजार रुपये से अधिक की अतिरिक्त आमदनी हुई। इन सभी गतिविधियों से उनकी कुल वार्षिक आय 1,50,468 रुपये तक पहुंची।
मुख्यमंत्री के सुकमा प्रवास के दौरान समसाद को चेक प्रदान कर सम्मानित एवं प्रोत्साहित किया गया। उनकी सफलता सुकमा जिले की अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी है। वर्तमान में जिले में 7,553 महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। समसाद का कहना है कि सही मार्गदर्शन, समूह की ताकत और सरकारी योजनाओं का लाभ मिले तो ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार और समाज की आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं।




























