सरायपाली:बलौदा के अंकित भोई ने पीएचडी हासिल कर बढ़ाया क्षेत्र का मान

सरायपाली। ग्राम बलौदा निवासी एवं शासकीय नवीन महाविद्यालय पिरदा में हिंदी के सहायक प्राध्यापक अंकित भोई को हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग द्वारा हिंदी साहित्य के क्षेत्र में “नक्सल समस्या पर केंद्रित हिंदी उपन्यासों की उपादेयता” विषय पर शोध कार्य पूर्ण करने पर डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) की उपाधि प्रदान की गई है। उनका शोध कार्य कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भिलाई नगर के हिंदी विभाग के वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं शोध निर्देशक डॉ. सुधीर शर्मा के निर्देशन में संपन्न हुआ।
अंकित भोई को कथा साहित्य में नक्सल समस्या पर शोध करने वाले देश के प्रथम शोधार्थी के रूप में भी उल्लेखनीय माना जा रहा है। उनके शोधग्रंथ में नक्सल समस्या का राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के विशेष संदर्भ में विस्तृत विश्लेषण किया गया है। शोध में समकालीन हिंदी साहित्य में नक्सल विमर्श के विशेषज्ञ राजीव रंजन प्रसाद एवं गिरीश पंकज के साक्षात्कार भी शामिल किए गए हैं।
शोध में नक्सलवाद की पृष्ठभूमि, आदिवासी जीवन, सामाजिक असमानता, विस्थापन, विकास की चुनौतियाँ, शासन-प्रशासन की भूमिका तथा मानवीय संवेदनाओं का साहित्यिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और वैचारिक दृष्टि से व्यापक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। शोध के निष्कर्षों में बताया गया है कि नक्सल समस्या पर आधारित हिंदी उपन्यास केवल साहित्यिक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना जागृत करने और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अंकित भोई की प्रारंभिक शिक्षा ग्राम बलौदा में हुई। उन्होंने स्व. राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह शासकीय महाविद्यालय, सरायपाली से स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की। बी.एड. के साथ वे तीन बार राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) तथा दो बार राज्य पात्रता परीक्षा (सेट) उत्तीर्ण कर चुके हैं। उन्हें केंद्र सरकार की राष्ट्रीय कनिष्ठ अनुसंधान अध्येतावृत्ति (जेआरएफ) भी प्राप्त हो चुकी है। वे पिछले 16 वर्षों से देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लघुकथाओं एवं आलेखों का निरंतर लेखन कर रहे हैं।
अंकित भोई के पिता कृष्ण कुमार भोई शासकीय शिक्षक, माता प्रभावती भोई व्यवसायी हैं। उनकी पत्नी शासकीय नवीन महाविद्यालय पिरदा में प्राणीशास्त्र की सहायक प्राध्यापिका तथा बहन रायपुर स्थित शासकीय दूधाधारी बजरंग कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में प्राणीशास्त्र की अतिथि व्याख्याता हैं।
इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय परिवार, कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राध्यापकों, साहित्यकारों, शोधार्थियों एवं शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई दी है। अंकित भोई ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने शोध निर्देशक डॉ. सुधीर शर्मा, गुरुजनों, माता-पिता, परिवारजनों एवं शुभचिंतकों के सहयोग, मार्गदर्शन और आशीर्वाद को दिया है।
































