महासमुंद : दिव्यांग बच्चों की पहचान हेतु विशेष सर्वे अभियान शुरू

महासमुंद। जिले के 0 से 18 वर्ष आयु वर्ग के दिव्यांग एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए विशेष सर्वेक्षण अभियान प्रारंभ किया गया है। अभियान के सफल संचालन हेतु कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने समाज कल्याण, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा विभाग तथा समावेशी शिक्षा से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर श्री लंगेह ने कहा कि दिव्यांग बच्चों के चिन्हांकन का कार्य पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ किया जाए। सर्वेक्षण दल घर-घर पहुंचकर बच्चों की पहचान करेंगे, ताकि जिले का कोई भी पात्र बच्चा शासन की योजनाओं एवं सुविधाओं से वंचित न रहे। यह अभियान 17 जुलाई तक संचालित होगा, जिसमें बच्चों की दिव्यांगता की स्थिति के साथ आधार कार्ड की उपलब्धता एवं उसकी स्थिति का भी आकलन किया जाएगा।
अभियान के माध्यम से चिन्हित बच्चों को शिक्षा, विशेष शिक्षण सामग्री, सहायक उपकरण, चिकित्सा परीक्षण, दिव्यांग प्रमाण-पत्र तथा अन्य शासकीय योजनाओं से जोड़ा जाएगा।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हेमंत रमेश नंदनवार ने बताया कि कई प्रकार की दिव्यांगताएं सामान्य रूप से दिखाई नहीं देतीं, इसलिए विशेष चेकलिस्ट के आधार पर प्रत्येक बच्चे का सावधानीपूर्वक परीक्षण किया जाएगा। उन्होंने सर्वे प्रपत्रों की त्रुटिरहित एंट्री एवं डिजिटल डाटा की शुद्धता बनाए रखने पर भी जोर दिया।
जिला मिशन समन्वयक रेखराज शर्मा ने बताया कि जिले में दृष्टिबाधित, श्रवण बाधित, चलन बाधित, बौद्धिक दिव्यांगता, विशिष्ट अधिगम अक्षमता, सिकल सेल सहित कुल 21 प्रकार की दिव्यांगता श्रेणियां शामिल हैं। सर्वे कार्य के लिए विकासखंड स्तरीय अधिकारियों, बीआरपी एवं स्पेशल एजुकेटर्स को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। साथ ही प्रत्येक विद्यालय में एक शिक्षक को ‘इन्क्लूसिव एम्बेसडर’ नियुक्त किया जा रहा है, जो दिव्यांग बच्चों के मेंटर के रूप में कार्य करेंगे।
जिले में वर्तमान में कुल 3,461 दिव्यांग बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें महासमुंद विकासखंड में 1,017, पिथौरा में 645, बसना में 612, सरायपाली में 595 तथा बागबाहरा में 592 बच्चे शामिल हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी बी. एल. देवांगन ने जिलेवासियों से अपील की है कि सर्वेक्षण दल के घर पहुंचने पर बच्चों से संबंधित सही एवं सटीक जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि प्रत्येक पात्र बच्चे तक शासन की सुविधाएं पहुंचाई जा सकें।





























