कृषि ऋण के लिए सहकारी समितियों में किसानों कि होगी जमीन बधक

छतरसिग पटेल।सरायपाली. खरीफ सीजन के शुरुआत समय में किसानों को अनेक समस्या का सामना करना पड़ रहा है. इस समय बीवन, नक्शा खसरा नहीं बनने से काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है.शासन के निर्देश के बाद भी अनेक किसानों के जमीन का आनलाईन नहीं किया गया है. जिसका खामयाजा इस समय किसानों को उठाना पड़ रहा है.सहकारियो समिति के माध्यम से किसानों को ऋण देने कि प्रक्रिया भी बदल गया है.जिस तरह राष्ट्रीयकृत व प्राईवेट बैकों में बंधक बनाया जाता है, अब सहकारियो समितियों के द्वारा भी बंधक बनाया जायेगा इसके लिए सहकारी समितियों के द्वारा भी आनलाईन बी- वन खसरा मंगाया जा रहा है, प्राप्त जानकारी के अनुसार नया साफ्टवेयर आ जाने के कारण इसमें अनेक दिक्कत आ रही है. चुकि जो साफ्टवेयर आया है उसमें फसल के कालम में फसल का उल्लेख ही नहीं है कहीं कहीं यह जानकारी भी है कि किसानों का जो जितना जमीन है वह आनलाईन में नहीं है. बी-वन मे फसल का उल्लेख नहीं रहेगा तो ऋण मिल पाना संभव नहीं है. किसान पटवारियों के पास दौड़ लगा रहे हैं, तो वही दूसरी ओर पटवारी भी परेशान है, बताया जाता है कि पुराने साफ्टवेयर डाल देने के कारण यह समस्या हो रही है.
अभी तक नहीं हुआ है हजारो किसान का नक्शा आनलाईन
आनलाईन प्रणाली में समूचे जमीन का नक्शा, खसरा अपलोड किया जाना चाहिए, परंतु जिले में अधिकाश किसानों का नक्शा, खसरा अपलोड नहीं किया गया है. जो किसान जागरूक है या जिनकाे आवश्यकता पड़ती है, वही पटवारी के पास जाकर आनलाईन करवाये है, कई लोग तो जो एक, दो साल में जमीन खरीदे हैं उनका भी अभी तक आनलाईन नहीं किया गया है, वे पटवारी के चक्कर लगा रहे हैं.
इस संबंध में ब्लॉक पटवारी संघ अध्यक्ष श्री नारायण बारीक जी ने बताया कि वर्तमान में जो साफ्टवेयर आया है उसमें डिजिटल हस्ताक्षर, फसल का प्रकार का उल्लेख नहीं है. इससे पटवारी भी नहीं एंट्री कर पा रहे हैं. उनहोंने बताया कि किसान उनके पास पहुंच रहे हैं लेकिन साफ्टवेयर का वर्जन बदल देने के कारण वे भी परेशान है. विगत दिनों प्रदेश स्तरीय सम्मेलन हुआ था उसमें यह तय हुआ है कि 8 मई तक प्रदेश के सभी पटवारी अपना डिजिटल हस्ताक्षर तहसील कार्यलय में जमा कर देगे.

























