छत्तीसगढ़

खेत बेचना चाहते थे पिता जी बेटियों ने रोका, अब पांच एकड़ में खुद ही हल जोत रहीं

छत्तीसगढ़ का एक जिला है कोंडागांव। यहां उमरगांव में 65 साल का एक किसान रहता है। उसका नाम अमल साय है। उसकी दो बेटियां हैं। एक का नाम हेमबती (22 साल) और दूसरी का नाम लखमी (18 साल) है। मां बहुत ज्यादा नहीं पढ़ीं। एक साल पहले इस परिवार के सामने खाने-पीने की भी दिक्कत थी। बच्चियों की पढ़ाई तो दूर की बात थी।

लिहाजा, पिता अमल साय ने सोचा कि अपनी पांच एकड़ की जमीन बेच दूं, ताकि कोई छोटा-मोटा काम कर लूं और परिवार को पाल सकूं। जब जमीन बेचने की बात आई, तो बेटियों ने पिता का हाथ रोक दिया। बोलीं- हमारी जिंदगी के लिए जमीन बेचने जा रहे हो, लेकिन यह जमीन ही हमारी जिंदगी बदलेगी। आपके पास साथ देने के लिए हाथ नहीं हैं न… तो हम आपका साथ देंगी, हम आपका हाथ बनेंगी।

बेटियों ने जब हौसला दिया, तो पिता की आंखें भर आईं और जमीन बेचने का इरादा छोड़ दिया। अपनी जमीन पर दोनों बेटियों के कांधे पर हल रखा और जुताई शुरू कर दी। दो फसल लेने के बाद अमल साय को समझ आया कि बेटियां कितनी सही थींं। इस बार मक्के की फसल लेने के लिए वो बेटियों के साथ खेतों की जुताई में लगा हुआ है और बेहद खुश है। ये बेटियां इसी तरह पांच एकड़ खेत की जुताई करती हैं।

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काका खबरीलाल

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