छत्तीसगढ़महासुमंद

शिव की प्रिय कांवड़ यात्रा जानें इस यात्रा से जुड़ी कई खास बातें।

रिपोर्ट: देशराज दास महासमुंद सहायक ब्यूरो

काकाखबरीलाल/महासमुंद: कहते हैं कि भगवान परशुराम ने शिव के नियमित पूजन के लिए पुरा महादेव में मंदिर की स्थापना करके कांवड़ में गंगाजल से पूजन कर कांवड़ परंपरा की शुरुआत की थी। आज वही परंपरा कांवड़ यात्रा का आधार मानी जाती है, जो देशभर में प्रचलित है। वैसे कर्इ आैर कथायें भी कांवड़ यात्रा से जुड़ी हैं, जैसे एक कथा के अनुसार जब समुद्र मंथन से निकले विष का पान करने से शिव जी की देह जलने लगी तो उसे शांत करने के लिए देवताआें ने विभिन्न पवित्र नदियों आैर सरोवरों के जल से उन्हें स्नान कराया। तभी से सावन माह में कांवड़ में सुदूर स्थानों से पवित्र जल लाकर शिव का जलाभिषेक करने की परंपरा प्रारंभ हुर्इ। एक अन्य कथा में समुद्र मंथन के बाद शिव जी को ताप से शांति दिलाने के लिए रावण द्वारा कांवड़ में जल ला कर शिव जी को शांति प्रदान करने की बात कही गर्इ है, परंतु सबसे ज्यादा प्रचलित कथा परशुराम जी की ही है।

बैधनाथ धाम में स्पर्श पूजा के लिए जल ले जाते हुए भक्तजन….

प्रतिवर्ष सावन मास की चतुर्दशी के दिन पवित्र नदियों के जल से शिव मंदिरों में शंकर जी का अभिषेक किया जाता है। वैसे तो ये ये धार्मिक परंपरा है, लेकिन इसके सामाजिक सरोकार भी हैं। मान्यता है कि कांवड के माध्यम से जल की यात्रा का यह पर्व सृष्टि रूपी शिव की आराधना के लिए हैं।

पुत्र प्राप्ति का अनुष्ठान

पौराणिक मान्यताआें के अनुसार सावन में कांवड़ के माध्यम से जल अर्पण करने से अत्याधिक पुण्य तो प्राप्त होता ही है, साथ ही एेसा विश्वास है कि कांवड़ यात्रा के बाद जल चढ़ाने पर पुत्र की प्राप्ति होती। अलग अलग जगहों की अलग मान्यताएं रही हैं, ऐसा मानना है कि सर्वप्रथम भगवान परशुराम ने कांवड़ लाकर “पुरा महादेव”, में जो उत्तर प्रदेश प्रांत के बागपत के पास मौजूद है, गढ़मुक्तेश्वर से गंगा जी का जल लाकर उस पुरातन शिवलिंग पर जलाभिषेक, किया था। आज भी उसी परंपरा का अनुपालन करते हुए श्रावण मास में गढ़मुक्तेश्वर, जिसका वर्तमान नाम ब्रजघाट है, से जल लाकर लाखों लोग श्रावण मास में भगवान शिव पर चढ़ाकर अपनी कामनाओं की पूर्ति का वरदान प्राप्त करना चाहते हैं।

सम्पूर्ण भारत में है प्रचलन

उत्तर भारत में भी गंगा के किनारे के क्षेत्रों में कांवड़ का बहुत महत्व है। राजस्थान के मारवाड़ी समाज में गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बदरीनाथ के तीर्थ पुरोहित जो जल लाते हैं और प्रसाद के साथ जल देते हैं, उन्हें कांवड़िये कहते हैं। ये लोग गोमुख से जल भरकर रामेश्वरम में ले जाकर भगवान शिव का अभिषेक करते थे। आगरा जिले के पास बटेश्वर में, जिन्हें ब्रह्मलालजी महाराज के नाम से भी जाना जाता है, भगवान शिवजी का शिवलिंग रूप के साथ-साथ पार्वती, गणेश का मूर्ति रूप भी है। सावन मास में कासगंज से गंगाजी का जल भरकर लाखों की संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का कांवड़ यात्रा के माध्यम से अभिषेक करते हैं। ऐसी मान्यता है कि प्रत्येक राशि वालेे अलग अलग तरह से शिव पूजन की विधि अपना सकते हैं ।

सावन में हर राशि का व्यक्ति शिव पूजन से पहले काले तिल जल में मिलाकर स्नान करे। शिव पूजा में कनेर, मौलसिरी और बेलपत्र जरुर चढ़ाए। इसके अलावा किस राशि के व्यक्ति को किस पूजा सामग्री से शिव पूजा अधिक शुभ फल देती है, इसका उल्लेख भी जानें-

मेष–इस राशि के व्यक्ति जल में गुड़ मिलाकर शिव का अभिषेक करें। शक्कर या गुड़ की मीठी रोटी बनाकर शिव को भोग लगाएं। लाल चंदन व कनेर के फूल चढ़ावें।

वृष-इस राशि के लोगों के लिए दही से शिव का अभिषेक शुभ फल देता है। इसके अलावा चावल, सफेद चंदन, सफेद फूल और अक्षत यानि चावल चढ़ाएं।

मिथुन–इस राशि का व्यक्ति गन्ने के रस से शिव का अभिषेक करे। अन्य पूजा सामग्री में मूंग, दुर्वा और कुशा भी अर्पित करें।

कर्क–इस राशि के शिवभक्त घी से भगवान शिव का अभिषेक करें। साथ ही कच्चा दूध, सफेद आंकड़े का फूल और शंखपुष्पी भी चढ़ाएं।

सिंह–सिंह राशि के व्यक्ति गुड़ के जल से शिव का अभिषेक करें। वह गुड़ और चावल से बनी खीर का भोग शिव को लगाएं। मदार के फूल भी चढ़ाएं।

कन्या–इस राशि के व्यक्ति गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक करें। शिव को भांग, दुर्वा व पान चढ़ाएं।

तुला–इस राशि के जातक इत्र या सुगंधित तेल से शिव का अभिषेक करें और दही, शहद और श्रीखंड का प्रसाद चढ़ाएं। सफेद फूल भी पूजा में शिव को अर्पित करें।

वृश्चिक–पंचामृत से शिव का अभिषेक वृश्चिक राशि के जातकों के लिए शीघ्र फल देने वाला माना जाता है। साथ ही लाल फूल भी शिव को जरुर चढ़ाएं।

धनु–इस राशि के जातक दूध में हल्दी मिलाकर शिव का अभिषेक करें। भगवान को चने के आटे और मिश्री से मिठाई तैयार कर भोग लगाएं। पीले या गेंदे के फूल पूजा में अर्पित करें

मकर–नारियल के पानी से शिव का अभिषेक मकर राशि के जातकों को विशेष फल देता है। साथ ही उड़द की दाल से तैयार मिष्ठान्न का भगवान को भोग लगाएं। नीले कमल का फूल भी भगवान काे चढ़ाएं।

कुंभ–इस राशि के व्यक्ति को तिल के तेल से अभिषेक करना चाहिए। उड़द से बनी मिठाई का भोग लगाएं और शमी के फूल पूजा में अर्पित करें। यह शनि पीड़ा को भी कम करता है।

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काका खबरीलाल

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