
सरायपाली।बसना:- छ. ग. का सीमावर्ती यह क्षेत्र कई वर्षों से अंचल के विकास के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं लोग जिले की मांग कर रहे है. सरायपाली -बसना क्षेत्र को जिला बनाने की मांग 32 साल पुरानी है। इसी कडी में जिला हेतु बनाई गई समिति की बैठक जनपद कार्यालय के मनरेगा हाल सरायपाली में रखी गयी। बैठक में मुख्यरूप से जयदेव भोई , तिलक साहू,टिकेश्वर मिश्रा,आशिक़ हुसैन,तेजराम बिसी,जिला बनाओ समिति के सदस्य तथा सराईपाली के आम नागरिक बडी संख्या में उपस्थित थे।
नए जिलों के लिए ये मापदंड
नए जिले बनाने के लिए 15 तरह के मापदंड तय किए गए थे। इनमें जनसंख्या, विकास की जरूरत, विकास के लिए संसाधनों की उपलब्धता, आदिवासी क्षेत्र, वनाच्छादित क्षेत्र, पूरी तरह से अविकसित, जिला मुख्यालय से दूरी, सीमा पर नक्शली गतिविधियां , कानून व्यवस्था, अपराध, तस्करी प्रभावित क्षेत्र, सांप्रदायिकता आदि प्रमुख है। जिले बनाने की मांग वाले अधिकांश प्रस्ताव इन मापदंडों को पूरा नहीं कर पाने के कारण जिले के लिए दावेदारी करते हुए भी जिला नही बन पाते हैं।
निचले स्तर तक बदलाव संभव
अगर नए जिले बनने की घोषणा होती है तो ग्राम पंचायत और पटवार सर्किल तक बदलाव की संभावना जताई जा रही है। हालांकि ग्राम पंचायत व पंचायत समिति को खंडित नहीं किया जाएगा, बल्कि पूरी तरह से नए जिले में जोड़ा (हस्तांतरित किया) जाएगा। ग्राम पंचायत संवैधानिक संस्था होने के कारण इसमें कोई बदलाव करने के स्थान पर पटवार सर्किल को ग्राम पंचायत क्षेत्रानुसार, तहसील को पंचायत समिति क्षेत्रानुसार और एसडीएम व डीएसपी (पुलिस) का सर्किल को समान करने के लिए बदला जा सकता है।
ऐसे आएगा आर्थिक भार
नए जिलों की घोषणा तो आसान है, लेकिन इनके लिए खर्च की राशि सरकार के लिए भारी पड़ सकती है। एक जिला बनाने पर अगले पांच वर्ष के दौरान 800 से 900 करोड़ रुपए तक का आर्थिक भार आता है। इसमें संस्थापन और भवन आदि शामिल है। प्रशासन में रिकरिंग खर्च 150 करोड़ रुपए और पुलिस लाइन के लिए 200 करोड़ रुपए की प्राथमिक जरूरत होगी। इनका कहना है
सरायपाली बसना क्षेत्र में विकास के लिए नए जिले बनने चाहिए। अगर सराईपाली को जिला मुख्यालय बनाया जाता है तो उक्त खर्च में भारी कमी आनी है । सरकार को ज्यादा खर्च नही करने पड़ेंगे।
वो मापदंड जिसका उल्लेख बैठक में किया गया
1 छ. ग. का राज्यवर्ती सीमा ओडिसा का सीमावर्ती क्षेत्र ।
2 पर्याप्त मात्रा में जिले के आवश्यक भूखड़ की उपलब्धता।
3. वर्तमान में जिला महासमुंद से 120 कि. मी की दूरी
4. पूरे राज्य के कुल 5 अकाशवानी केंद्र में से एक सराईपाली में स्थित है।
5. नवोदय विद्यालय तथा केन्दीय विद्यालय की उपस्थिति
6. कुटुम्ब न्यायालय , व्यवहार न्यायालय , विधुत न्यायालय, ए डी जे न्यायालय ।
7. राजधानी के पश्चात यह व्यापार का प्रमुख केंद्र है।
8 . प्रशासनिक दृष्टि से केन्द्रिकृत स्थल
9. यहाँ कुल 12 राष्ट्रीय बैंक है।
10. कानूनी व्यवस्था के सडीओपी कार्यालय।
11 विद्युत् विभाग का ई ई कार्यालय
12. शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था आई टी आई होना
13 यह जिले का सबसे बड़ा अनुविभाग है
14. राष्ट्रीय राजमार्ग 53 जो बहुत बड़ा राजमार्ग है पर स्थित होना।
15. 100 बिस्तर अस्पताल जो जिलाचिकित्सालय में होता है।
16. दर्शनीय स्थल शिशुपाल पर्वत और सिंघोरा का देवी मंदिर।
17 सीमावर्ती होने से गांजा , नोट, नकली नोट एवम अन्य सामग्रियों का आये दिन तस्करी होना।
18 नक्सलियों के सक्रियता के कारण यह नक्सली प्रभावित क्षेत्र है।
19 कुछ दिनों पूर्व इस क्षेत्र से 2 वर्ड रिकॉर्ड बनाना
20 पूरे भारत मे से सरायपाली को स्वच्छता में प्रथम पुरुस्कार प्राप्त होना।।
ये सभी मापदंड सरायपाली बसना को जिला बनाने के मांग को मजबूती देती है। जिले की मांग को निरंतर रखने का निर्णय बैठक में लिया गया। अगर मांग को ख़ामोश कर दिया जाए तो यह क्षेत्र सारंगढ के प्रस्तावित नक्शे के अंतर्गत सारंगढ जिले में चले जाएगा

बैठक में सर्व सहमति से तिलक साहू को जिला बनाओ समिति का अस्थायी अध्यक्ष बनाया गया।
इस समिति के संयोजक रेखा पुरोहित सिल्विया बाघ निरुपमा देवता तथा अनिता चौधरी ने जिले की मांग को अब दृढ़ करने की बात कही। बैठक में निम्न बातों पर चर्चा की गई।
अगर यह क्षेत्र अपना विकास चाहती है तो जन प्रतिनिधि तथा आम जनता को एक साथ मिलकर अपने क्षेत्र के विकास की मांग जिले के रूप में करनी होगी





























