शराब पकड़ने में आबकारी विभाग की अपेक्षा पुलिस आगे

बीते वर्ष भर में आबकारी विभाग में बना 34/2 के मात्र 4 प्रकरण
काकाखबरीलाल,सरायपाली । क्षेत्र में अवैध शराब पर अंकुश लगाने के लिए आबकारी विभाग का महत्वपूर्ण योगदान रहता है. लेकिन विगत एक वर्ष से जहां अवैध शराब की बिक्री में बहुत अधिक इजाफा हुआ है. वहीं आबकारी विभाग द्वारा अवैध शराब पकड़ने के मामलों में काफी गिरावट आई है. बीते एक वर्ष के सभी प्रकरण यदि देखें जाएं तो अवैध शराब पकड़ने में आबकारी विभाग की अपेक्षा पुलिस को अधिक सफलता मिली है. ऐसा प्रतीत होता है मानो आबकारी विभाग का कार्य पुलिस ही संभाल रही है.
आबकारी विभाग को विगत सत्र 2018 में 34/2 के मात्र 4 प्रकरण ही 5 लीटर से ऊपर शराब पकड़ने में सफलता मिली है. जबकि 34/1 के 11 और डेढ़ लीटर से अधिक शराब पकड़ने में 36 ए के 7 प्रकरण, सार्वजनिक जगह पर नशापान करने वालों के 36च के 31 प्रकरण बनाए गए हैं. बीते वर्ष के आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो पता चलता है कि उनके द्वारा कार्यवाही केवल खानापूर्ति के लिए की जा रही है. जबकि उनका कार्य शराब से संबंधित प्रकरण के लिए ही होता है. जबकि सिंघोड़ा थाने में 2018 में 34/1 के 24 प्रकरण, 34/2 के 35 प्रकरण और 36 च के 7 प्रकरण बनाए गए हैं. आबकारी विभाग की अपेक्षा सिंघोड़ा थाने में 34/2 के 30 प्रकरण अधिक दर्ज हुए हैं. इसी प्रकार सरायपाली थाना में 34/1 के 124 प्रकरण, 34/2 के 71, 36 च के 11 एवं सार्वजनिक जगहों पर मदिरापान करने वाले 228 प्रकरण दर्ज किए गए थे. इन आंकड़ों से स्पष्ट नजर आता है कि आबकारी विभाग की अपेक्षा पुलिस विभाग शराब पकड़ने में अधिक कार्यवाही कर रही है.
वही शराब दुकान के नजदीक अवैध रूप से संचालित कई चखना सेंटर हैं, जिस पर कोई विशेष कार्यवाही भी नहीं देखी जा रही है. चुनावी समय पर ही एक बार कार्यवाही देखी गई थी. इसके अलावा मूल्य से अधिक रेट पर शराब बिक्री एवं झोला भर-भरकर अवैध शराब की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है. जिस पर शिकायत पर भी कार्यवाही नहीं होती.
इस संबंध में आबकारी सब इंस्पेक्टर एस एन साहू से पूछे जाने पर उन्होने बताया कि स्टाफ की कमी की वजह से आबकारी विभाग से ज्यादा थाना वाले कार्यवाही करते हैं. चर्चा में यह भी बताया कि शराब दुकानों का निरीक्षण, पूरे हिसाब, स्टॉक, नगदी आदि का मिलान भी माह में एक बार करना होता है. साथ ही शराब मामले से संबंधित कई अदालती कार्यवाही में भी समय देना पड़ता है. चखना सेंटरों में शराब पीते दिखे जाने पर ही कार्यवाही होती है. पूर्व में कार्यवाही भी की गई है.





























