सरायपाली : धान की फसल पर माहो के हमले से किसान परेशान

सरायपाली (काकाखबरीलाल). धान की फसल पर माहो के हमले से किसान परेशान हैं। इन दिनों बदली और बारिश की वजह से खेतों में माहो का हमला तेज हो गया है। इससे किसान खासा परेशान हैं। माहो धान की फसल के लिए बहुत ही खतरनाक बीमारी है। जिस खेत में माहो लग गया, उस खेत की पूरी फसल चौपट हो जा रही है। दवा छिड़काव का असर नहीं हो रहा है।
दो-दो तीन-तीन बार दवा छिड़कने के बावजूद भी माहो पर नियंत्रण नहीं मिल पा रहा है। किसानों का कहना है कि अगर समय रहते दवा का छिड़काव नहीं किया और माहो को नियंत्रित नहीं कर पाए तो फसल पूरी तरह चौपट हो जाएगी और हाथ में सिर्फ पैरा ही आएगा।
माहो का प्रकोप अक्सर धान में बाली आने के बाद ही देखने को मिलता है। इस समय ठीक बाली आने और पकने का समय है। किसान बड़ी मेहनत और लगन के साथ खेती किसानी को अंजाम दिया है ताकि उसे अच्छी फसल मिल सके मगर माहो के हमले ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। किसानों ने बताया कि इसे स्थानीय भाषा में भूरा माहो भी कहा जाता है जो एक तरह का भूरे रंग का छोटा कीट होता है जो लाखों की संख्या में पनपते हैं और देखते ही देखते पूरी फसल को चट कर जाते हैं। किसान इन दिनों माहो के नियंत्रण में दिन रात एक कर दी है और महंगा से महंगी दवा का छिड़काव करने में लगे हैं। माहो का प्रकोप खासकर उन खेतों में ज्यादा देखने को मिल रहा है, जो गहरे खेत हैं और उसमें पानी भरा हुआ है। मौसम में परिवर्तन से भी महू का प्रकोप देखने को मिल रहा है। खेतों में धान के साथ उगे घास पर निंदा नाशक का असर नहीं हो रहा है, जिसे निकालने स्थानीय किसानों को मजदूर रखकर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।
जानकारी मिली है कि कृषि विभाग की मिलीभगत से ही दवा विक्रेता फल फूल रहे हैं और किसानों को लूटने का काम कर रहे हैं। यहां तक कि दवाई दुकानों को किराए की डिग्री से भी संचालित किया जा रहा है, कई ऐसे दुकान है जो डिग्रीधारी हैं वह दवा बेचते नजर नहीं आते, उनके स्थान पर अन्य व्यक्ति दवाई बेचते हैं।
फसल को हो रहा नुकसान
समय में दवा का छिड़काव न करने व कम दाम वाले हल्के नकली निंदानाशक दवाई का छिड़काव के चलते खेतों में उगे घास पर दवाई का असर नहीं हो रहा है। समय के साथ साथ किसान सभी सुविधा का लाभ उठा रहे हैं, पूर्व में जहां खेत में उगे अनावश्यक घास को निकालने काफी मेहनत व खर्च करना पड़ता था, निंदा नाशक दवाई आ जाने से किसानों को खेत के घास को उखाड़ने से राहत मिल गई थी, लेकिन देखा देखी में कम रेट में नकली दवाई निकालकर किसानों की समस्या को नकली दवाई विेक्रेताओं ने बढ़ा दिया है। लोगों को नकली दवाई देकर लूटने का कार्य जोर-शोर से चल रहा है। नतीजन किसान अनावश्यक घास को मारने दवाई के लिए अलग खर्च कर रहे हैं, घास के नष्ट न होने पर उसे निकालने पुन: मजदूर लगाकर घास को करवाने का कार्य किसानों द्वारा किया जा रहा है। इससे किसानों को डबल नुकसान उठाना पड़ा है। किसानों को असली नकली दवा फर्क भी नहीं पता चलता। नकली दवा को ही लेकर छिड़काव कर देते हैं, जब दवा छिड़काव के बाद भी अनावश्यक घास नहीं मरने से किसानों को ठगे जाने का एहसास होता है, लेकिन किसान अपनी पीड़ा किसी को ना बताकर चुप बैठ जाते हैं। किसान चुप न बैठकर नकली दवा देकर लुटने वाले कि शिकायत करे तो संचालित कई दवा दुकानें बंद हो जाएगी।



























