केला, हल्दी और जिमीकंद की खेती से सफलता के शिखर पर पहुंचे भरत क्षेत्रपाल

बिलासपुर जिले के मोपका ग्राम के किसान श्री भरत क्षेत्रपाल आज उन प्रगतिशील किसानों में गिने जाते हैं, जिन्होंने अपने अनुभव, नवाचार और मेहनत के बल पर खेती को लाभकारी एवं टिकाऊ व्यवसाय का स्वरूप दिया है। लगभग 30 से 35 वर्षों के कृषि अनुभव के साथ उन्होंने अपनी 23 एकड़ भूमि को विविधतापूर्ण और आधुनिक कृषि का सफल मॉडल बना दिया है।
खेती के प्रति समर्पण और दूरदर्शिता ने उन्हें क्षेत्र के किसानों के बीच एक अलग पहचान दिलाई है। वर्षों से खेती करते हुए उन्होंने विभिन्न फसलों के उत्पादन में दक्षता हासिल की है। अरबी (जिमीकंद) और हल्दी उनकी प्रमुख फसलें हैं, जिनकी खेती में उन्हें विशेष सफलता मिली है। इन फसलों के साथ उन्होंने केले की उन्नत खेती को भी अपनाया और उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त किए।
वर्तमान में श्री क्षेत्रपाल अपनी 8 एकड़ भूमि पर जी-9 किस्म के केले की खेती कर रहे हैं। उनके खेत में केले की दूसरी फसल सफलतापूर्वक तैयार हो रही है, जो उनकी वैज्ञानिक खेती और बेहतर प्रबंधन क्षमता का प्रमाण है। आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की उनकी सोच ने उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि की है। श्री क्षेत्रपाल अपने खेतों में ड्रिप सिंचाई प्रणाली का उपयोग करते हैं। इस तकनीक से पानी की बचत होने के साथ-साथ फसलों को आवश्यकतानुसार नमी प्राप्त होती है। इससे उत्पादन लागत में कमी आती है और फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है। जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन की दिशा में भी यह तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उन्नत खेती में श्री क्षेत्रपाल की उपलब्धियों ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई है। वर्ष 2006 और 2011 में भारत सरकार द्वारा उन्हें प्रतिष्ठित “कृषिरत्न” पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। ये सम्मान उनकी लगन, नवाचार और कृषि के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान का प्रतीक है। विपणन के क्षेत्र में भी वे सजग और जागरूक किसान हैं। वे अपनी उपज का विक्रय मंडी के माध्यम से करते हैं, जिससे उन्हें उचित मूल्य प्राप्त होता है और आय में स्थिरता बनी रहती है। खेती के साथ बाजार की समझ ने उन्हें आर्थिक रूप से भी सशक्त बनाया है।
प्रगतिशील किसान श्री भरत क्षेत्रपाल की सफलता यह संदेश देती है कि यदि पारंपरिक कृषि ज्ञान को आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़ा जाए, तो खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और समृद्ध बनाया जा सकता है। उनकी उपलब्धियां न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। आज वे इस बात का जीवंत उदाहरण हैं कि मेहनत, अनुभव, नवाचार और वैज्ञानिक सोच के बल पर खेती में नई ऊंचाइयां हासिल की जा सकती हैं।






























