सरायपाली

सरायपाली : खुरहा चपका रोग से बचाने डोर-टू-डोर टीकाकरण का कार्य जोर-शोर से

सरायपाली (काकाखबरीलाल). मवेशियों को मुंह पका-खुर पका (खुरहा चपका) नामक रोग से बचाने डोर-टू-डोर टीकाकरण का कार्य जोर-शोर से चल रहा है। हालांकि, ऐहतियात के तौर पर मवेशियों को टीका लगाया जा रहा है। पशु चिकित्सा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अन्य जिलों व राज्यों में मवेशियों में इन दिनों खुरहा चपका नामक विषाणु जनित रोग देखा जा रहा है।

मवेशियों को इस रोग से बचाने पशु चिकित्सा अधिकारी, सहायक पशु चिकित्सा अधिकारी, पशु परिचारक, प्राइवेट कृत्रिम गर्भधान कार्यकर्ता व गौ सेवकों की मदद से डोर-टू-डोर पशुपालक के घरों में जाकर टीकाकरण का कार्य जोर-शोर से किया जा रहा है। एक जानकारी के मुताबिक ब्लॉक में लगभग 35000 मवेशी हैं। इसमें से लगभग 50 प्रतिशत मवेशियों को इस संक्रामक बीमारी से बचाने टीकाकरण किया जा चुका है। संभावना जताई जा रही है कि आगामी माह 10 से 15 नवंबर तक पूर्ण टीकाकरण हो जाएगा। पशुपालकों को हिदायत दी जा रही है कि वे बाजार से खरीदे मवेशियों, अन्य प्रदेश, जिला से आए मवेशियों से लगभग 10 दिन तक घर में रखे मवेशियों से दूरी बनाकर रखें। मवेशियों को इस खुरहा नामक बीमारी से बचाने इतनी तेजी से टीकाकरण किया जा रहा है कि लगभग 20 दिनों में ही ब्लॉक के 50 प्रतिशत मवेशियों का टीकाकरण पूर्ण कर लिया गया है।

पशुओं के मुंह में पड़ जाते हैं छाले
पशु विभाग ने बताया कि जो मवेशी इस खुरहा चपका नामक बीमारी से पीड़ित होते हैं, तब खूर में घाव हो जाते हैं। जिससे वह चलने में असक्षम हो जाता है। पशुओं को बुखार आने के साथ-साथ मुंह में छाले पड़ जाते हैं। जिससे मवेशी खाना-पीना भी बंद कर देते हैं और उनकी कार्य क्षमता कम हो जाती है। गाय दूध देना बंद कर देती हैं। बड़े मवेशियों में इसकी मृत्यु दर कम है। छोटे मवेशियों में इसकी मृत्यु दर अधिक है। बाहर से नए खरीदे मवेशियों से दूरी बनाकर भी इस बीमारी से मवेशियों को बचाया जा सकता है। यह एक ऐसा संक्रामक बीमारी है, जो एक मवेशी से दूसरे मवेशी में फैलता है। इस संक्रामक रोग से मवेशियों को बचाने टीकाकरण ही सबसे उपयुक्त उपाय है। हालांकि, विकासखंड में अब तक कोई केस नहीं मिला है। फिर भी प्रशासन अलर्ट मोड पर है और टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। जिन जगहों पर यह रोग फैला हैं वहां के पशुपालक परेशान हैं। रोग अब पशुपालकों के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है। चिकित्सक पशुपालकों को जागरूक भी कर रहे हैं। जिससे लक्षण दिखने पर तत्काल उपचार हो सके।

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