महांसमुद : वनों में लगने वाली आग के रोकथाम के लिए वन विभाग के मुखिया ने कि अनोखी पहल

गर्मी के दिनों में वनों में लगने वाली आग के रोकथाम के लिए वन विभाग के मुखिया ने अनोखी पहल की है। आमजनों को वनों में लगने वाली आग के रोकथाम और इससे संबंधित जानकारी देने के लिए जिले के सभी 545 पंचायत के प्रतिनिधियों के साथ जनपद और जिला पंचायत के प्रतिनिधियों को डीएफओ ने पत्र लिखा है। पोस्टकार्ड के जरिए इन पत्रों को सभी प्रतिनिधियों को भेजा गया है।
छत्तीसगढ़ी भाषा में लिखे गए इस पत्र में यह अपील की गई है कि गर्मी के दिनों में वनों में अक्सर आग लगने की खबर आती है। जंगल में आग लगने से जैव विविधता, छोटे पौधे, कीट पतंग, घास और झाड़ी जल जाते हैं। इससे जमीन की सतह भी जल जाती है। ऐसा होने से जमीन पर गिरने वाला बीज अंकुरित नहीं हो पाता और बारिश के दिनों में में गिरने वाला पानी जमीन के भीतर जा नहीं पाता।
ऐसे में हमें आग से जंगलों को बचाना होगा
वन मंडलाधिकारी पंकज राजपूत ने पाती में लिखा है-महोदय, आसा हाबय के आप जम्मों झन सुखी होहू। आगू घलों आप मन परिवार संग बने-बने रइहव अउ समाज निर्माण मं अपन भूमिका ल अइसनेच निभावत रइहव। ए बछर मं हमर किसान भाई मन सासन के योजना ले अतिरिक्त आय प्राप्त करे हाबय। ओही वनक्षेत्र के आस-पास रहे वाला ग्रामीण मन ह वनक्षेत्र ले इन्द्रजौ, धवई फूल, महुआ फूल, चिरौंजी आदि ले वनोपज के संग्रहन कर न्यूनतम समर्थन मूल्य मं बेचत हाबयं। आप मन ह जानत होहू के ए बेरा मं जंगल में आगी अड़बड़ लगथे। ये आगी ह जंगल के जैव विविधता जइसन छोटे-छोटे पौधा, कीट पतंगा, घास दूबी, झारी सबो ल जला के राख देथे।
जंगल के भुईंया ह घलो जर जथे। करसी हंडिय़ा कर पांके भुंइया मंं पेंड़ ले गिरे बिजहा मन के अंकुरन नी हो सकय। एमा एक बात अड़बड़ दुखदाई हे के बरसात के पानी ह जरे भुंजाय धरती के भीतरी मं सोखय नहीं। ए बेरा वैश्विक तापवृद्धि अउ जलवायु परिवर्तन के कारन बरसात मं पानी के मात्रा घलो कमतर होइसे अउ मौसम मंं अप्रत्यासित बदलाव आय हाबय। एखर ले भू-जल स्तर मं बिक्कट गिरावट आय हे।
भुंइया के भीतरी के पानी ह पताल लोक मं चले जावथे। सासन के महत्वाकांक्षी योजना जइसन नरवा विकास योजना के पर्याप्त लाभ लेहे खातिर हमन ल अपन जंगल ल आगी उबारा ले बचाना जरूरी हे। महुआ बीने के बेरा हो गे हवे अउ ग्रामीण भाई बहिनी, दाई-ददा मन महुआ बीने बर रूख राई के खाल्हे सुक्खा पत्ता मं आगी लगा देथें। अइसे मं मोर गोठ ल धियान देके सुनव-कि कोन्हों रुख राई के तीर तखार मं कौनों परकार के आगी झन लगाहू। ये ह दावानल के रूप न ले लेथे। कौनो कौनों जघा मं कतको असामाजिक तत्व मन ह घलो सिकार करे बर या फेर तेंदू पत्ता पाये खातिर वन मं आगी लगा देथे। कतको झन मन बीरी सुलगा के लापरवाही ले उहीनचे फेंक देथे। अइसन हरकत झन करव। कौनों मनखेमन अइसन हरकत करत दिखय, त ओला रोकव, रोके के चाही घलो। ये जंगल ह आप मन के धन दुगानी आय। मोर बिनती हाबय के अपन ये धरोहर ल आप सबो संजोहू, संवारहू। जंगल के उजरे मं आप मन के भारी नुसकान हे। अपन हरियर अउ फलत फुलत माटी ल बचाय खातिर ये मुहिम मं मोला आप सब झन के सलाह अउ साथ चाही। मैं तुंहर जंगल के देखरेख करइया-पंकज।

























