जिले का एक गोठान ऐसा भी:जिसने एक हजार से ज्यादा घायल गायों को इलाज कर स्वस्थ किया; अब इन्हीं से दूध व घी, गोबर की लकड़ी भी बाजार में

सड़क पर घायल और लहूलुहान या चल-फिर पाने में असमर्थ गायों के बारे में कभी किसी ने सोचा नहीं कि इलाज के बाद ये न सिर्फ स्वस्थ हो सकती हैं, बल्कि फिर कामधेनु हो सकती हैं। राजधानी की एक संस्था ने यही सोचा और 2016 में तय किया कि केवल ऐसी ही गायों को वे अपने गोठान में लाकर उन्हें इलाज से स्वस्थ करेंगे।
अब तक इस गोठान में हजार से ज्यादा ऐसी ही गाय लाई जा चुकी हैं और गोठान इसलिए आदर्श बन गया है कि इनमें से 800 से अधिक स्वस्थ होकर इतना दूध दे रही हैं कि महीने का टर्नओवर बढ़कर 4 लाख रुपए हो चुका है। इससे दर्जनों परिवारों को सहारा और रोजगार दोनों मिला है। गोठान इतना चर्चित हुआ है कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के छात्र भी यहां अध्ययन के लिए आ रहे हैं। राजधानी में गोकुल नगर की पहल सेवा समिति 2016 से दिन-रात गायों की सेवा में समर्पित है। समिति के सदस्य 1000 से अधिक घायल गायों को अपनी गोशाला में ला चुके हैं।
समिति के संस्थापक रितेश अग्रवाल बताते हैं कि गोशाला में हर नस्ल की गाय हैं। जिन्हें इनके मालिकों ने मरणासन्न छोड़ दिया था, उनके बछड़े हो रहे हैं और काफी दूध देने लगी हैं। इस गोठान में रोजाना 70 लीटर दूध का तो दही और घी बनाया जा रहा है। गोबर से बने उत्पादों जैसे इसकी लकड़ी, दीए और अन्य उत्पादों से आय अलग है। राज्य सरकार ने 2018 से गोबर की खरीदी शुरू करके इसे रोजगार से जोड़ा, लेकिन संस्था उससे पहले से ऐसा कर रही है। रितेश के मुताबिक संस्था 2016 के पहले से गोबर से दीये बना रही है। मगर, इस दौरान वाहनों की टक्कर से घायल पड़ी गायों को देखकर विचार आया कि मानवता के नाते इनके लिए कुछ करना चाहिए। रितेश और उनकी संस्था गायों का इलाज करती आ रही है। एक कॉल पर मदद लिए पहुंच जाती है।
दीए रोशन: 25 लोगों को रोजगार दे रही समिति, इनमें 13 महिलाएं भी
एक पहल सेवा समिति 25 लोगों को नियमित रोजगार दे रही है, जिनमें 13 महिलाएं हैं। यह समिति गोबर से दीये और मूर्तियां बना रही है। इनके इसी काम को देखते हुए अयोध्या मंदिर निर्माण समिति द्वारा इस वर्ष 1 लाख दीए के ऑर्डर दिए गए थे। तो वहीं यह संस्था दीयों के साथ-साथ गोबर की लकड़ी बनाने के बाद खासी चर्चा में आई थी। इनके द्वारा बनाई इस लकड़ी का इस्तेमाल श्मशानघाटों में होता है। अब इन्होंने गोबर से चप्पल बनाना शुरू किया है, जिसका अच्छी खासी मांग है। संस्था का मासिक कारोबार 4 लाख जा पहुंचा है।

























