अमिता ने पैडमैन से सीखी टेक्निक, खुद असेंबल किया, हर महीने बना रहीं 7 हजार से ज्यादा पैड

महिलाओं की डिलीवरी के दौरान उपयोग में लाए जाने वाले मेटरनिटी पैड्स अब दुर्ग में भी तैयार हो रहे हैं। इसे सस्ते दामों में उपलब्ध कराए जाने की जिम्मेदारी बोरसी निवासी अमिता कुमार ने संभाली हुई है। उनका मानना है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए ऐसे पैड अत्यंत आवश्यक होते हैं।
उन्होंने कोयम्बटूर के पैडमैन से प्रेरणा लेकर ऐसे पैड्स तैयार करने का निर्णय लिया। उन्होंने गांधीग्राम इंस्टीट्यूट कोयम्बटूर से तकनीक सीखी। इसके बाद दुर्ग में अल्ट्रा वायलेट मशीन को असेंबल किया। सामान नागपुर से मंगवाया। फिर काम शुरू कर दिया। इसके बाद से निरंतर काम जारी है। अमिता का यह पूरा कारोबार बोरसी के पंचशील नगर सोसाइटी स्थित निवास से संचालित हो रहा है। इसके लिए उन्होंने 6 लाख रुपए का लोन भी लिया। आज हर महीने 7 हजार से ज्यादा पैड्स तैयार कर रही हैं, उनके पैड्स की डिमांड दुर्ग के अलावा अन्य जिलों में भी बनी हुई है।
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इस क्षेत्र में कदम रखने वाली पहली महिला अमिता कुमार ने बताया कि कोयम्बटूर में पैडमेन कहे जाने वाले अरुणाचलम से मुलाकात की। इस मुलाकात ने उनकी जिंदगी में परिवर्तन ला दिया। उन्हें लगा कि वूमन हाइजीन सेगमेंट में कार्य करना चाहिए। फिर उन्होंने काम की शुरुआत की।
हर महीने 7 हजार से ज्यादा पैड तैयार कर रहीं
अमिता कुमार बताती हैं कि प्रति महीने 7 हजार मेटरनिटी पैड तैयार कर रही हैं। आदिम जाति विभाग के गर्ल्स हॉस्टल की लड़कियों के लिए अंबागढ़ में सेनेटरी पैड का पहला प्रोजेक्ट पूरा किया। इसके बाद मेटरनिटी पैड्स पर काम वर्ष 2012 में शुरू किया। सरकारी अस्पतालों में भी डिमांड है।
हर महीने 7 हजार से ज्यादा पैड तैयार कर रहीं
अमिता कुमार बताती हैं कि प्रति महीने 7 हजार मेटरनिटी पैड तैयार कर रही हैं। आदिम जाति विभाग के गर्ल्स हॉस्टल की लड़कियों के लिए अंबागढ़ में सेनेटरी पैड का पहला प्रोजेक्ट पूरा किया। इसके बाद मेटरनिटी पैड्स पर काम वर्ष 2012 में शुरू किया। सरकारी अस्पतालों में भी डिमांड है।
























