गर्मी उमस से परेशान स्कूली छात्र बरामदे में बैठ कर पढ़ने विवश

।।जर्जर स्कूल भवन को तोड़ कर नया स्कूल भवन बनाने शासन गंभीर नहीं ।।
शुकदेव वैष्णव, बसना- बसना से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम परसकोल के शासकीय प्राथमिक शाला 1954 में निर्मित मूल शाला भवन के जर्जर हो जाने के कारण खपरैल को निकालकर छत पर आर्बेस्टर लगाया गया था भवन के छत की ऊंचाई मात्र छह -सात फीट होने के कारण स्कूल के दोनों कमरे में गर्मी और उमस से बच्चे बैठ नहीं पाते . उमस और गर्मी इतनी ज्यादा रहती है . की पंखा भी काम नहीं आता . गांव की लाइन हमेशा खराब होती रहती है.जिससे नियमित रूप से पंखा नहीं चल पाता .गर्मी और उमस से परेशान स्कूली बच्चे स्कूल भवन के कमरे के बजाय छात्र छात्रा बाहर परछी में बैठ कर पढ़ाई करने विवश हैं.जिससे छात्र छात्राओं की तबियत गर्मी ,उमस से बिगड़ती रहती .बच्चों के हित में नए शाला भवन की स्वीकृति अत्यंत आवश्यक है. यदि समय रहते शासन प्रशासन के द्वारा यहां नए स्कूल भवन स्वीकृत नहीं करती है तो पालक चुनाव बहिष्कार जैसे कठोर कदम भी उठा सकते हैं .

यहां बना एक अतिरिक्त भवन पहले से जर्जर है.जिसमे जर्जर हालत को देखते हुए ताला लगा दिया गया है. तथा एक स्कूल भवन विगत 20 साल से बन रहा है. छत ( लेंटर )होने से पहले काम पूर्ण नहीं हो पाने के कारण दीवाल भी जर्जर हो कर गिर रहा है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार शासकीय प्राथमिक परसकोल संकुल केंद्र बंसुला विकास खंड बसना की स्थापना वर्ष 1954 में हुई थी. चूंकि मूल शाला खपरैल वाला था जो जर्जर होने के कारण पंचायत एवं श्रमदान की सहायता से 1992 मैं खपरैल को हटाकर आर्बेस्टर लगाया गया था।चूंकि आर्बेस्टर की ऊँचाई मात्र 7 से 8 फीट एवम इतनी कम ऊँचाई के कारण भीषण गर्मी पड़ती है जिससे बच्चों का स्वास्थ्य बहुत खराब होता है एवम पढ़ाई पर विपरीत असर पड़ता है। विद्यालय मैं पहली से पाँचवीं तक संचालित है।

शाला का अतिरिक्त भवन जिसका निर्माण 1992 मैं हुआ पिछले 5 वर्षो से अतिजर्जर है जिसे डिस्बेंटल करने हेतु प्रपोजल भी उच्च अधिकारियो को दिया गया है.शाला की सबसे बड़ी विडंबना ये है कि 20 वर्ष पूर्व शासन द्वारा नवीन शाला भवन स्वीकृति प्रदान की गई जो निर्माणाधीन था किंतु अपूर्ण एवम क्षतिग्रस्त है।
सत्र 2018-19 मैं शाला मैं कुल 91 बच्चे है।आर्बेस्टर कि स्थिति 25 वर्ष पुराना होने से जर्जर स्वम क्षतिग्रस्त हो चुका है।हर साल एवम समय पर विभागीय अधिकारियों को शाला प्रबंधन समिति एवम ग्रामीणों द्वारा अवगत कराया जाता रहा है फिर भी समस्या का समाधान नही हो पा रहा है. यहां शीघ्र स्कूल भवन स्वीकृत करने की जरूरत है।





























