छत्तीसगढ़

महिला बाल विकास अधिकारी के खिलाफ शिकायत दर्ज

महिला बाल विकास अधिकारी के खिलाफ लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के तहत गंभीर मामले में 24 घंटे में कार्रवाई की जानी है। लेकिन 46 दिन बाद भी किसी तरह की कार्रवाई नहीं होने पर आवेदक ने महिला बाल विकास अधिकारी कोंडागांव के खिलाफ सिटी कोतवाली में पहुंचकर लिखित शिकायत कर कार्रवाई करने की मांग की है।

सिटी कोतवाली कोंडागांव में एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर लिखित आवेदन देने वाले आवेदक पतिराम निवासी जोबा ने जानकारी देते हुए बताया है कि एक गांव के माता-पिता द्वारा अपनी नाबालिग लड़की का विवाह कर देने और जिससे नाबालिग के गर्भवती हो जाने के संबंध में जानकारी मिलने पर उसके द्वारा कानून के जानकारों से राय लेने के बाद ही 16 अगस्त 2021 को महिला एवं बाल विकास विभाग कोंडागांव के जिला अधिकारी के समक्ष एक लिखित शिकायत पत्र प्रस्तुत कर नाबालिग का विवाह कर देने वाले गैर जिम्मेदार माता-पिता पर उचित कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया गया था।

लेकिन पूरे डेढ़ माह यानि करीब 1100 घंटे बीत जाने पर भी एफआईआर दर्ज नहीं कराया जा सका है। जिस पर आवेदक द्वारा पुनः नाबालिग बच्चों के साथ होने वाले लैंगिक अपराधों पर रोक लगाने के लिए शासन द्वारा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 बनाया गया है।

जिसमें स्पष्ट रुप से लेख है कि किसी भी नाबालिग के साथ किसी भी तरह का गंभीर लैंगिक अपराध करने की सूचना प्राप्त होने के 24 घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होती है। यदि सूचना प्राप्त होने के बाद सक्षम अधिकारी द्वारा मामले की रिपोर्ट करने या अभिलिखित करने में विफल रहने के लिए दण्ड का प्रावधान धारा 21 (1), (2) में दर्ज है। जिसके अनुसार 6 माह से एक साल तक की सजा का प्रावधान है। आवेदक ने शिकायत पत्र की प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक जिला कोंडागांव को भी भेजा है।

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काका खबरीलाल

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