धमतरी

शहर में घोड़े के मरने पर मालिक ने निकाली अंतिम यात्रा

धमतरी (काकाखबरीलाल). इंसान के मरने के बाद धूमधाम और बाजे गाजे के साथ उनकी अंतिम यात्रा निकाली जाती है। लेकिन धमतरी शहर में एक घोड़े से उसके मालिक का इतना लगाव था, कि उसके मरने के बाद घोड़े का इसानों जैसा अंतिम संस्कार किया, क्रिया कर्म से पहले घोड़े की अंतिम यात्रा निकाली गई। घोड़े के साथ 20 साल की दोस्ती को याद करते हुए र घोड़ा मालिक फफककर रोता रहा। इस नजारे को देखने वाले भी अपने आंसू नहीं रोक पाए। दोस्ती अपने आप मे एक अनोखा रिश्ता होता है, इसमें जाति, धर्म, देश काल, अमीरी गरीबी कोई मायने नहीं रखती। इंसान और जानवर की दोस्ती पर कई फिल्में भी बन चुकी हैं। धमतरी में भी ऐसे ही इंसान और घोड़े की 20 साल पुरानी दोस्ती थी, जो अब टूट गई है। घोड़े की मौत हो गई है, अपने वफादार साथी की मौत के बाद घोड़ा मालिक ने उसकी अंतिम यात्रा रीति रिवाज के साथ निकाली।शहर के गणेश चौक में रहने वाला विक्की शादियों में बग्गी और घोड़ा किरााए पर देने का काम करता है। उसके पास 20 साल से राजा नाम का एक घोड़ा था और रानी नाम की घोड़ी। इन दोनों को विक्की अपने परिवार के सदस्य की तरह रखता था। राजा- रानी और विक्की मिल कर पूरे परिवार को चलाते थे। इनमें आपस मे गहरा लगाव हो गया था। लेकिन अचानक राजा की मौत हो गई। घोड़े की मौत से विक्की को गहरा सदमा लगा है। राजा घोड़े की मौत से सिर्फ विक्की नहीं बल्कि अड़ोस पड़ोस वाले भी दुखी हैं। शहर से निकलती घोड़े की शव यात्रा और रोते बिलखते विक्की को जिसने भी देखा उसकी भी आंखे नम हो गई। वहीं राजा की मौत के बाद रानी घोड़ी भी अनमनी नजर आ रही है।

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छत्तरसिंग पटेल

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