कांग्रेस ने जारी किया घोषणा पत्र ‘जन आवाज’..गरीब-किसान और रोगजार पर सबसे ज्यादा जोर

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक पार्टी कांग्रेस ने अपना घोषणापत्र जारी कर दिया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए एक-एक कर पार्टी ने बड़े वादों का पिटारा खोला। इस घोषणा पत्र को जन आवाज नाम दिया गया है। सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी राहुल के साथ मौजूद हैं। राहुल गांधी ने कहा कि घोषणापत्र को बंद दरवाजों के पीछे नहीं जनता के बीच जाकर तैयार किया है। जिस तरह कांग्रेस के चुनाव चिन्ह हाथ में पांच उंगलियां है, इसी तरह हमारे घोषणापत्र में पांच बड़ी बातों का जिक्र है। किसान और रोजगार इस देश में सबसे बड़े मुद्दे हैं।
राहुल गांधी ने कहा, ”घोषणापत्र में पांच बड़े विचार हैं, पहला है बड़ा विचार है न्याय का विचार प्रधानमंत्री ने कहा कि सबके खाते में 15 लाख आएंगे, जो कि झूठ है. मैंने वहीं से बात पकड़ी और अपनी घोषणापत्र कमेटी से कहा कि मुझे ऐसा नंबर बताइए जो सरकार गरीबों के खाते में सीधे पैसा डाल सकती है. उन्होंने बताया कि 72000 सालाना, ये 72000 गरीबी पर वार है. एक साल में 72 हजार यानी 5 साल में 3.60 लाख रुपये. किसानों और गरीबों की जेब में सीधा पैसा जाएगा. पीएम नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी करके देश की अर्थव्यवस्था को जाम किया, वह इससे खत्म हो जाएगा.”
दूसरा कदम है रोजगार नरेंद्र मोदी जी ने दो करोड़ रोजगार की बात कही वो भी झूठ. मैंने अपनी कमेटी से कहा कि इसकी सच्चाई बताइए, उन्होंने बताया कि 22 लाख सरकारी पद खाली पड़े हैं. ये पद मार्च 2020 तक भरे जा सकते हैं.10 लाख युवाओं को ग्राम पंचायत में रोजगार देगी. हम मनरेगा को 150 दिन गारंटीड करना चाहते हैं. हम मनरेगा के 100 दिन बढ़ाकर 150 करना चाहते हैं. इसके साथ ही अगर नए उद्योगों के लिए बना किसी इजाजत के अपना उद्योग शुरू कर सकते हैं. 3 साल के लिए देश के युवाओं को बिजनस खोलने के लिए किसी से कोई इजाजत नहीं लेनी होगी.”
राहुल गांधी ने कहा, ”राजस्थान, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पंजाब में हमने किसान का कर्जा मायप किया. जैसे रेलवे का बजट होता है वैसे ही हमारा मानना है कि किसान बजट अलग होना चाहिए. देश के किसान को मालूम होना चाहिए कि उसको कितना पैसा मिल रहा है, उसकी MSP कितनी बढ़ाई जा रही है. घोषणापत्र में हमने निर्णय लिया है कि किसान अगर कर्जा न दे पाए तो वह आपराधिक नहीं बल्कि सिविल मामला हो.”
कांग्रेस घोषणापत्र के खास अंश
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि हम पांच मुद्दों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उनके लिए न्याय अहम है। राहुल गांधी ने कहा कि उनके लिए देश की गरीबी अहम है इसलिए न्याय स्कीम लाया जाएगा। वो मानते हैं कि पीएम मोदी का 15 लाख का नारा जुमला था।लेकिन उनकी न्याय योजना के तहत 72 हजार रुपए गरीबी पर वार करेगी।
राहुल गांधी ने कहा कि मनरेगा योजना में कार्यदिवसों की संख्या 100 दिन से बढ़ाकर 150 दिन करेगी।
उन्होंने कहा कि आम बजट के साथ साथ सत्ता में आने पर उनकी सरकार किसान बजट पेश करेगी
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि नए उद्योगों को स्थापित करने वाले लोगों को पहले तीन साल तक किसी तरह के परमिशन लेने की जरूरत नहीं होगी।
किसानों के कर्ज लेने के मामले में कहा कि कांग्रेस का मानना है कि कर्ज न चुकाने की वजह से किसानों पर क्रिमिनल केस दर्ज होता है।लेकिन वो सरकार में आने पर इसे सिविल केस घोषित करेंगे।
राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में कांग्रेस सरकार जीडीपी का 6 फीसद खर्च करेगी।
राहुल गांधी ने कहा कि आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के मामले में कांग्रेस की नीति से हर कोई वाकिफ है। देश की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाएंगे
पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम कांग्रेस के घोषणापत्र के बारे में जानकारी दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के इस वचन पत्र को नागरिकों के एक बड़े समूह ने तैयार किया है।
चिदंबरम ने कहा कि देश के सामने बेरोजगारी बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार सभी मोर्चों पर नाकाम रही है। मौजूदा सरकार झूठे वादों और दावों वाली सरकार है।
पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने कहा कि मोदी सरकार में करीब पांच करोड़ नौकरियां गईं। मोदी सरकार सिर्फ बड़ी बड़ी बातें करती रही है।
कांग्रेस ने 31 मार्च 2020 तक 20 लाख नौकरियों का सृजन करेगी। ग्राम पंचायत स्तर पर 10 लाख नौकरियां देंगे। इसके साथ ही मौजूदा सरकार आयुष्मान भारत के जरिए लोगों को स्वास्थ्य बीमा दे रही है।इसके जरिए प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। लेकिन सरकार में आने पर वो इसे सरकारी बीमा एजेंसियों के दायर में लाएंगे।
2019 का चुनाव कई मायनों में अहम है। 23 मई को नतीजे ये साफ कर देंगे कि क्या पीएम मोदी का जादू बरकरार रहा या विपक्षी दल लोगों का भरोसा जीतने में कामयाब रहे । 2014 के नतीजों को देखें तो 30 साल बाद कोई पार्टी अपने दम पर दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुई थी।



























