बसना

बसना:जाबो बालवाड़ी बढ़ाबो शिक्षा की गाड़ी थीम के तहत कार्यशाला का आयोजन

 

बसना। आज  बी आर सी भवन बसना में जिला मिशन समन्वयक श्री रेखराज शर्मा जी के मार्गदर्शन में “जाबो बालवाड़ी बढ़ाबो शिक्षा की गाड़ी “थीम पर बसना शिक्षा विभाग द्वारा बीईओ श्री जे आर डहरिया,बी आर सी बसना डॉक्टर पूर्णानंद मिश्रा की अगुवाई में चिंतन कार्यशाला का आयोजन हुआ जिसमें बसना विकासखंड के सभी स्कूलों में संचालित बालवाड़ी प्रमुख शिक्षक बंधु सम्मिलित हुए इस कार्यशाला में बी आर सी बसना डॉक्टर पूर्णानंद मिश्रा द्वारा बालवाड़ी के महत्व एवं भविष्य में बालवाड़ी योजना के उत्तम संचालन हेतु कार्य योजना बनाकर शिक्षकों को आगे बढ़ाने हेतु प्रेरित किया गया बी आर सी डॉक्टर पूर्णानंद मिश्रा जी ने शिक्षकों के मध्य बालवाड़ी की महत्व पर विषय रखते हुए कहा कि बाल्यावस्था वह समय है जब बच्चे जिंदगी की सबसे अधिक चीज़ सीखते हैं इस समय उनकी सीखने की क्षमता अधिक होती है और वह खेल-खेल में किसी भी चीज को आसानी से सीखते हैं छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य राज्य में 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए पूर्व प्राथमिक शिक्षा को सुलभ और मजबूत बनाना है यह योजना नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है और इसका लक्ष्य वर्ष 2025 तक सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण पूर्व प्राथमिक शिक्षा प्रदान करना है इसके लिए उन्होंने “जाबो बलवाड़ी बढ़ाबो शिक्षा की गाड़ी” थीम के साथ कार्य योजना बनाकर शिक्षकों को आगे बढ़ाने हेतु प्रेरित किया तथा बी आर सी डॉ मिश्रा ने कहा कि आने वाले समय में बालवाड़ी ,कक्षा पहली और दूसरी को लक्ष्य करते हुए विकास खंड स्तर पर एक विशेष चरण बद्ध योजना बनाई जाएगी और उसका क्रियान्वयन करते हुए समय समय पर उसकी समीक्षा भी की जाएगी ताकि बच्चे अगली कक्षाओं में बुनियादी साक्षरता में कमजोर न रहें और उच्च कक्षाओं की शिक्षा बाधित न हो ।कार्यशाला में उपस्थित शासकीय प्राथमिक शाला करनापाली के शिक्षक डॉ वीरेंद्र कर ने कहा कि बलवाड़ी के बच्चे यदि सीखने के लिए प्रोत्साहित होंगे तो स्कूल के माहौल के लिए आगे की तैयारी आसान होगी तथा बच्चों को खेल-खेल में अध्ययन करने पर स्वाभाविक रूप से बच्चे विद्यालय में जुड़ सकेंगे तथा उनका स्वाभाविक विकास होगा कार्यक्रम के प्रभारी श्री वारिश कुमार ने भी अपने उद्बोधन में कहा कि हम सबको ज्ञात है मनुष्य के मस्तिष्क का 85% विकास बाल्यावस्था में ही हो जाता है एक बच्चा अपने प्रारंभिक वर्षों में जो सिखता है वही चीजें स्कूल में और आगे जीवन में उसकी मदद करती हैं शिक्षण की शुरुआत तभी हो जानी चाहिए जब बच्चों का मस्तिष्क तैयार हो रहा हो इस प्रकार बालवाड़ी योजना का उद्देश्य बच्चों के मानसिक सामाजिक मनोवैज्ञानिक एवं संज्ञानात्मक विकास करने के लिए एक शिक्षण- सेतु के तौर पर कार्य करेगी एवं 5 से 6 वर्ष की उम्र में जब बच्चे पहली कक्षा में जाएं तो वे उसके लिए पूरी तैयार हो चुके हो। उक्त अभिव्यक्ति से सभी शिक्षकों ने खुशी जाहिर की एवं शिक्षा विभाग बसना द्वारा शिक्षकों के प्रोत्साहन के लिए किए गए प्रयास के लिए बी आर सी डॉक्टर पूर्णानंद मिश्रा को एवं टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दी ।अंत में कार्यक्रम प्रभारी वारिश कुमार द्वारा आभार व्यक्त किया गया।

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