एक तरफ धारा 144 लागु, वही बेखौफ वन्यजीवो का शिकार

झलप/काकाखबरीलाल (जॉन सेमसन ✍️) । जहाँ एक ओर कोरोना से बचने जिले में धारा 144 लागू है वही धारा 144 के दौरान लगभग 5 शिकारियों का दल आज दोपहर 1 बजे के आसपास कुछ पानी पीने आये जंगली जानवरों के शिकार करते खतरनाक हथियारों से लैश बागबाहरा के करीब सिर्री में नजर आया,हम आपको बता दे कि धारा 144 के दौरान किसी भी तरह के हथियारों को लेकर कोई भी नही घूम सकता और ना ही लोग झुंड में एकत्र हो सकते है।लेकिन धारा 144 के मौजूदगी में भी वन्य प्राणियों के खुले आम शिकार करते लोगो को देखा गया।इन्हें लोगो को वन्यजीव के शिकार से मना करने पर जाति विशेष को यही काम की बात कहने लगे,कुछ शिकारी आगे वन्यजीव को खेतो की ओर से घेरते और दौड़ाते हुए ले गये मामले की जानकारी में पुलिस को डायल 112 के जरिये दी गई लेकिन पुलिस के आने से पहले ही उक्त शिकारी जंगलो की ओर भाग खड़े हुए।शिकारियों के हौसले इस मामले में बुलन्द है ,आगे निकल चुके शिकारियों के हाथ मे तीर धनुष के अलावा कई अन्य हथियार भी मौजूद होने की बात लोगो ने बताई है।शिकारियों को वन्य प्राणियों के शिकार करने से रोकने सुखरीड़बरी ग्राम के सरपंच देव महोबिया घटना स्थल पर अपने एक साथी के साथ पहुच कर उन्हें शिकार करने से मना कर रहे थे लेकिन वो शिकारी नही माने।इस दौरान सिर्री के एक बकरी पालन करने वाले बच्चे ने बताया कि मैंने कई बार इन्हें वन्यजीवो को मारने के लिये दौडाते देखा है,ये लोग सिर्री गाँव के कमार डेरा के है,इनके पास मैंने हिरण चीतल के सींग, खाल,धड़ आदि भी देखा है ,इन लोगों को वन्यजीवो का शिकार करने से मना करने पर ये नही मानते और तुमको क्या मतलब कहकर हमे भगा देते है।ऐसे में सवाल यह उठता है कि सिर्री से सटे घने जंगलों में मौजूद वन कर्मियों द्वारा क्या जिम्मेदारी निभाई जा रही है?जिम्मेदार अधिकारियों को ऐसे घटनाओ की जानकारी खुले आम घटने के बाद भी ना मिलना किन बातों को दर्शाता है? ग्रामीणों से सूचना यह भी मिली है कि उक्त सघन वन में तमाम तरह के छोटे बड़े जीव निवास करते है जो पानी के तलाश में गाँव के तालाब और खेतों तक आते है। जिनका बेधड़क शिकार इन दिनों तेजी से बढ़ गया है।

























