महांसमुद फर्जी रसीद मामला : 3 उच्च स्तरीय समिति करेगी जांच, 15 दिन में रिपोर्ट , पॉलिसी लैप्स होने के कगार पर

महासमुंद के एलआईसी प्रीमियम पाइंट से फर्जी रसीद जारी होने के मामले की उच्च स्तरीय समिति जांच करेगी। मंडल कार्यालय रायपुर द्वारा तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई जा रही है, जिसमें मंडल के उच्च अधिकारी के साथ आईटी एक्सपर्ट और स्थानीय विजिलेंस अधिकारी होंगे। यह कमेटी 15 दिन में अपनी रिपोर्ट मंडल प्रबंधक को सौंपेगी।
साथ ही एलआईसी पिछले 18 महीने में लैप्स हुई पॉलिसी की भी जानकारी निकाल रही है। इस मामले के उजागर होने के बाद महासमुंद से लेकर रायपुर मंडल के अधिकारी सकते में हैं, क्योंकि गंभीरता से जांच हुई तो आंच कई अधिकारियों तक पहुंच सकती है।
जिस प्रीमियम पाइंट पर फर्जीवाड़ा हुआ, वह महासमुंद के एलआईसी विकास अधिकारी धर्मेंद्र महोबिया के नाम पर है। उन्होंने अपने कर्मचारी उमेश निर्मलकर (जो एलआईसी एजेंट भी है) के नाम पर 29 दिसंबर 2021 को थाने में शिकायत की, जिस पर 29 जनवरी 2022 को एफआईआर दर्ज हुई। इसके बाद भी 3 फरवरी 2022 तक रायपुर मंडल के अधिकारी कह रहे हैं कि उन्हें इसकी सूचना नहीं है।
न लिखित, न मौखिक। उधर, मंडल कार्यालय के अधिकारियों ने इस बात को स्वीकार किया है कि भले ही एफआईआर उमेश के नाम पर दर्ज करवाई गई है, मगर प्रीमियम पाइंट धर्मेंद्र महोबिया के नाम पर है, वह सीधे जिम्मेदार है।
विकास अधिकारी के साथ-साथ ब्रांच मैनेजर भी जांच के दायरे में
महासमुंद सिटी कोतवाली पुलिस ने इस पूरे मामले में जांच तेज कर दी है। पुलिस की जांच सिर्फ उमेश निर्मलकर तक ही सीिमत नहीं है, बल्कि शिकायतकर्ता एलआईसी का विकास अधिकारी धर्मेंद महोबिया और महासमुंद एलआईसी ब्रांच मैनेजर बासुदेव पंसारी तक भी जाएगी। जांच अधिकारी एसआई योगेश सोनी का कहना है कि जैसे-जैसे पीड़ित सामने आएंगे और तथ्य मिलेंगे, जांच का दायरा बढ़ता जाएगा।
इन बिंदुओं पर होगी जांच
प्रीमियम पाइंट से किस प्रकार फर्जी रसीद जारी हो रही थी? कौन सा सॉफ्टवेयर इस्तेमाल हो रहा था। इसमें किस-किस की संलिप्तता है?
50 फर्जी रसीद थाने में जब्त है। इसके अतिरिक्त और कितने उपभोक्ताओं को फर्जी रसीदें जारी हुई। पॉलिसी धारकों का पता लगाकर उन्हें सूचना दी जाएगी, ताकि उनकी पॉलिसी री-एक्टिव की जा सके। उन्हें नुकसान न हो।
दोषी के खिलाफ कार्रवाई होगी
गंभीर मामला है तीन सदस्यीय कमेटी इस प्रकरण की जांच करेगी। 15-18 दिनों में जांच पूरी हो जाएगी। जो भी दोषी होगा, उसके विरुद्ध कार्रवाई होगी।-जीके जेना, वरिष्ठ, मंडल प्रबंधक, एलआईसी, रायपुर

























