बजट में मोदी सरकार से कितनी उम्मीदें पूरी हुईं और कितनी रहीं बाक़ी
बजट में मोदी सरकार से कितनी उम्मीदें पूरी हुईं और कितनी रहीं बाक़ी
यह बजट इस लिहाज़ से बहुत बढ़िया है कि इसमें कोई एक पक्ष ऐसा नहीं, जो दूसरों पर हावी हो जाए. निराकार ब्रह्म की तरह. जिसे जैसा पसंद आए वो वैसी कल्पना कर ले, वैसी तस्वीर देख ले. जिससे पूछा उसने यही कहा कि इस बजट की सबसे बड़ी ख़ासियत यही है कि इसमें कोई ख़ासियत नहीं, यानी हेडलाइन नहीं है.
पार्टी लाइन पर चलने वालों के लिए तो बहुत आसान होता है बजट का विश्लेषण. और नहीं भी होता तब भी वो अपने झुकाव के हिसाब से ही तारीफ़ या आलोचना करते. लेकिन बारीकी से देखें तो बजट में कुछ ऐसी ख़ास बातें हैं जिनसे इसका असर और दिशा साफ़ हो सकती है.
सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस बजट से ऐसे ज़्यादातर लोगों को निराशा हाथ लगी है, जो कुछ न कुछ पाने की उम्मीद में थे. उनमें एक बड़ा वर्ग तो इनकम टैक्स भरने वालों का है और दूसरा उससे बड़ा उन लोगों का वर्ग है जिन्हें सरकारी योजनाओं में पैसा या अनाज या काम दिया जा रहा है.
इन सभी को उम्मीद थी कि सरकार की कमाई अब पटरी पर आ रही है और वो उन्हें भी कुछ ऐसा देगी जिससे अपनी ज़िंदगी पटरी पर लाने में और मदद मिल सके. ज़ाहिर है वे निराश हैं और मिडिल क्लास यह बात साफ़-साफ़ कह भी रहा है.
डायरेक्ट टैक्स के मामले में ज़्यादातर लोगों को पता था कि कुछ ख़ास मिलने वाला नहीं है और ऐसा ही हुआ. छोटे कर दाताओं के अलावा ज़्यादातर लोगों के लिए यह राहत की बात ही थी कि कोई नया बोझ नहीं पड़ा.

























