छत्तीसगढ़

नए सिस्टम ने दिया दर्द, अम्बेडकर अस्पताल में हर कदम पर नई पर्ची

आंख में लकड़ी घुस जाने का इलाज कराने सीतापुर से आए कुंवर ने बताया कि वो आंबेडकर अस्पताल में सुबह 9 बजे से पर्ची कटाने के लाइन में खड़ा है, लेकिन दोपहर 12.30 बजे तक भी उसकी पर्ची नहीं काटी गई है। इस बदहाली का खामियाजा करीब 2000 हजार लोग रोज भुगत रहे हैं। वजह है पर्ची को लेकर बनाया गया नया सिस्टम। राजधानी रायपुर के डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल में ओपीडी पर्ची की नई व्यवस्था ने मरीजों को समस्या में डाल दिया है। अब यहां एक से दूसरे विभाग में रिफर किए जाने पर फिर से नई पर्ची बननी पड़ रही है। एनआईसी के सहयोग से किए जा रहे बदलाव के बाद अस्पताल में आने वाले मरीज को अब हर बार पर्ची कटानी पड़ेगी। अस्पताल में पहले यह व्यवस्था थी कि एक मरीज की काटी गई पर्ची का रजिस्ट्रेशन एक साल तक मान्य रहता था, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब नए और पुराने दोनों ही मरीजों को हर बाद अस्पताल में इलाज कराने के लिए पर्ची कटानी पड़ रही है। जिसका दुष्प्रभाव यह हुआ कि मरीजों को उपचार कराने के लिए किया जाने वाला इतहार करीब 2 से 3 घंटे तक बढ़ गया है। काउंटर के बाहर रेलवे स्टेशन जैसे हालात बन गए हैं। लंबी लंबी लाइनें लगी हैं। लोग दर्द कराहते हुए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। परिजन घंटों इंतजार कर लाइन में लगे हैं ताकि उनके अपनों का इलाज किया जा सके।

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काका खबरीलाल

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