फर्जी मस्टर रोल की सूचना देने वाले को ग्रामीणों ने सुनाई 20 हजार का दण्ड, थाने में की शिकायत

- कार्य करने के बावजूद मस्टर रोल में नहीं था नाम, इसलिए दी थी सूचना
काकाखबरीलाल,सरायपाली । ग्राम पंचायत भुथिया के आश्रित ग्राम मोहगांव में चल रहे तालाब गहरीकरण में हुए फर्जी मस्टर रोल मामला में नया मोड़ आया है. पात्र व्यक्ति को अपात्र बनाकर उन्हें वंचित किया गया है, वहीं मेट एवं रोजगार सहायक द्वारा अपने चहेते लोगों को अपात्र से पात्र बनाकर लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई है.
जब गांव के एक व्यक्ति पदमलोचन भोई पिता शंकरलाल भोई द्वारा रोजगार गारंटी कार्य करने के बावजूद उनका नाम मस्टर रोल से गायब होने पर मेट से संपर्क किया गया तो, उनके द्वारा किसी अन्य के नाम से फर्जी मस्टर रोल भरकर राशि देने की बात कही गई. जिसमें हितग्राही को सत्यता नजर नहीं आया और उनके द्वारा मीडिया को इसकी सूचना दी गई. मीडिया को इसकी भनक लगते ही अपना भांडा फूट जाने की डर से मेट द्वारा वे अपात्र लोग जिन्हें उसके द्वारा लाभ पहुंचाए जाने की कोशिश की जा रही थी, उन लोगों को एकत्रित कर एवं ग्रामीणों को बुलाकर एक बैठक रखी गई. मीडिया जनों को सूचना देने की बात को लेकर सूचनाकर्ता को बैठक में उपस्थित कुछ लोगों द्वारा फर्जी मस्टररोल मामले को दबाने एवं भविष्य में गांव के किसी भी फर्जी काम को मीडिया को सूचना न देने की हिदायद देते हुए 20 हजार रूपए दण्ड स्वरूप देने का फरमान सुना दिया. और तो और कुछ लोगों ने तो गांव से बाहर निकालने की भी धमकी दे डाली. बैठक में हुए इन बातों से सूचनाकर्ता पदमलोचन काफी डरा सहमा हुआ है और उसके द्वारा पुलिस को इसकी सूचना देकर अवश्यक कार्यवाही के लिए निवेदन किया गया है.
गांव के कुछ उपद्रवियों द्वारा किए गए इस तरह के कृत्य से ऐसा लगता है कि अवैध काम को अंजाम देने में कुछ ग्रामीणों का भी बड़ा योगदान रहता है. फर्जी तरीके से राशि कमाने के मामले का खुलासा पहली बार मोहगांव में देखने को मिला है. लेकिन यहां शिकायतकर्ता पर ही फर्जी मामले को अंजाम देने वाले हावी हो रहे हैं और उसके परिचित जिनका फर्जी रूप से मस्टर रोल में नाम उल्लेख है, उन्हें मेट एवं रोजगार सहायक द्वारा आगे कराकर ग्रामीणों को उकसाया जा रहा है. ग्रामीणों द्वारा भी पात्र हितग्राही को लाभ पहुंचाने की बात तो दूर बल्कि अपात्र लोगों का समर्थन करके पात्र के साथ अन्याय किया जा रहा है. ग्रामीणों के निर्णय से ऐसा लगता है मानो उनको घटना की पूरी जानकारी नहीं दी गई है और एकतरफा सुनवाई के लिए मजबूर किया गया है.


























