जिले में कालाबाजारी अपने चरम पर, दुकानदारों से मजबूरी वस समान खरीदने मजबूर

विजय चौहान@महासमुंद (काकाखबरीलाल) । सम्पूर्ण देशव्यापी लॉकडाउन के जहां केंद्र एवम राज्य सरकारें कोरोना महामारी से आम जनता को सुरक्षित रखने की व्यवस्था में लगी हुई है। वहीं दूसरी तरफ आम जनता को महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है, जहां एक तरफ सरकारी अधिकारी एवम कर्मचारी अपनी जान की परवाह न करते हुऐ दिन रात कोरोना वोलेंटियर के रूप में कार्यरत हैं, ये सभी अधिकारी एवम कर्मचारी चाहे वह अध्यापक हो, डॉक्टर हो, पुलिसकर्मी हो, पंचायत अधिकारी हो अथवा कोई भी सरकारी कर्मचारी हो सभी सरकारी सेवा से जुड़े हुये अधिकारीयों एवम कर्मचारियों अपने कर्तव्यों पर लगे हुए है। वही दूसरी तरफ समाज सेवी संस्थाओं से जुड़े लोग खुद एवम अपने सहयोगियों से भीख मांगकर अथवा सहयोग की अपील करते हुऐ गरीब जनता का पेट भरने में सरकार का सहयोग कर रहे हैं। सिक्के का दूसरा पहलू देखें तो व्यापारी वर्ग इस लॉकडाउन का फायदा उठाकर जरूरी सामानों को दुगनी तिगनी कीमत पर बेचकर अपनी तिजोरी भरने में लगे हुये हैं…।
उदाहरण के तौर पर देखा जाये तो के तेल 5 लीटर की कीमत जो कि लोकडाउन से 2 दिन पहले 500 रुपये की थी वहीं वर्तमान में इसकी कीमत 800-1000 रुपये तक है और तेल जिसका दाम पहले 1 टीपा का 1800-1900 था अब उसकी कीमत 2500 हो गई है। इसके अलावा अन्य खाद्य पदार्थों के रेट में भी बढ़ोतरी कर दी गयी है। पूछताछ करने पर भड़कते हुये कहते हैं कि इतने की है। लेनी हो तो लो अन्यथा अपना काम करो। ज्यादा पूछताछ करने पर कहने लगते है। कि ऊपर से हमे इतने का ही मिल रहा है। और तो और इससे बड़ी प्रशासन की नाकामी क्या होगी की 20 रुपये किलो का प्याज 40 में बिक रहा है। राजश्री पान मसाला पहले जिसका रेट 5 रुपये नग था वही अब 1 नग 10 रु में बिक रहा है। जिनको इन गुड़ाखु/तम्बाकू उत्पादों की लत लग चुकी है वो लोग मरता क्या न करता की तर्ज पर इनको खरीदने पर मजबूर होकर व्यापारियों की तिजोरी भरने पर मजबूर हैं। और व्यापारी भी बिना खौफ के इनको बेच रहे हैं। अब इसको प्रशासन की नाकामी कहें या व्यापरियों की प्रशासनिक अधिकारियों से मिलीभगत इस बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल है। कि इस लोकडाउन से जँहा सरकारें आम जनमानस को बचाने में लगी हुई हैं, वही व्यापरियों की इस कालाबाजारी से गरीब एवम मध्यमवर्गीय परिवारों में रोष व्याप्त है।सूत्रों के अनुसार अगर इस कालाबाजारी पर जल्द रोक नहीं लगाई गई तो आम जनता अपना गुस्सा सरकार, व्यापारियों एवम प्रशासन पर निकालने में कोई कमी नहीं छोड़ेगी।
































