सरायपाली : प्राथमिक शाला में है समस्याओं का अंबार अहाता के अभाव में परिसर बन जाता है आवारा मवेशियों एवं असामाजिक तत्वों का डेरा

सरायपाली. ग्राम पंचायत पझरापाली के आश्रित ग्राम जटाकन्हार के प्राथमिक शाला में अहाता नहीं होने से बच्चों को कई समस्याआंे का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दर्ज संख्या अधिक होने की वजह से शिक्षकों के साथ-साथ अतिरिक्त कमरे की आवश्यकता भी महसूस हो रही है।
प्राथमिक शाला के प्रधान पाठक हेमंत कुमार ने बताया कि स्कूल में एक तरफ अहाता नहीं होने से छात्र-छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अहाता जितनी बनानी है उसकी लंबाई 120 मीटर है। वहीं रात में स्कूल परिसर पर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है। स्कूल में हर साल पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन आहाता नही होने से वह गाय, बैलों का भोजन बन जाता है। असमय गाय, बैल, बकरी आदि कई पशु दिन के वक्त भी स्कूल परिसर में पहुंच जाते हैं और घार चरते रहते हैं। साथ में स्कूल परिसर में लगे पेड़ पौधों को भी चट कर जाते हैं। इसे देखते हुए स्कूल में पेड़ पौधे लगाना भी बंद कर दिए हैं। बच्चों के खेलने के वक्त भी जानवरों का आना बच्चों के लिए बाधक हो जाता है। स्कूल परिसर खुला रहने के कारण अक्सर असामाजिक तत्व मंडराते रहते हैं, जिससे पढ़ाई में व्यवधान होता है। एक तरफ अहाता है, लेकिन दूसरे तरफ नहीं होने से काफी समस्याएं हो रही है। छात्राओं की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। अक्सर गांव में किसी के घर में या सामाजिक कार्यक्रम होने से स्कूल की छुट्टी के बाद व रात में यहां असामाजिक तत्वों का अड्डा बन जाता है। वे स्कूल परिसर में गंदगी फैलाकर चले जाते हैं। मनचाहे कोई भी व्यक्ति या जानवर स्कूल परिसर के अंदर घुस जाते हैं, जिससे उनके पढ़ाई में बाधा उत्पन्न होती है। पुराना भवन टूटने के बाद नया अतिरिक्त कक्ष बनाने के बाद भी अभी तक बाउण्ड्रीवाल नहीं बनाया गया है। स्कूल भवन नया बनने के बाद पालकों को उम्मीद थी कि जल्द ही भवन के चारों ओर अहाता का निर्माण होगा पर ऐसा नहीं हुआ। वहीं प्रधान पाठक ने बताया कि बच्चों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है। स्कूल में 80 विद्यार्थी अध्ययनरत है। ऐसे में स्कूल की सुरक्षा के लिए जल्द से जल्द बाउंड्रीवॉल का निर्माण किया जाना आवश्यक है।
बीईओ को भी अवगत करा चुके हैं
वहीं शाला प्रबंधन एवं विकास समिति ने बताया कि स्कूल में अहाता न होने के कारण मवेशी एवं अन्य पशु प्रवेश कर जाते हैं, जिसके कारण विद्यालय में भय का वातारवण बना रहता है। इस संबंध में उन्होंने विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी को लिखित रूप से अवगत करा चुके हैं। वहीं पिछले महिना शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष रोशनलाल भास्कर, ओमप्रकाश पारेश्वर, हेमन्त कुमार भाई, केदारनाथ प्रधान, नंदलाल गढ़तिया, शैलेन्द्री भास्कर, पद्ामल नंद, पद्मावती भास्कर, श्यामबाई निराला, बसंती जगत, प्रियंका गढ़तिया, निर्मला सिदार, पद्मन, धोबीराम मांझी, खेमलाल सिदार आदि की उपस्थिति में एक बैठक रखकर लोक निर्माण विभाग को प्रस्ताव भेजने तथा निर्माण कार्य एजेंसी बनाने पर सहमति बनाई।
शिक्षकों की भी बनी हुई है कमी
जानकारी अनुसार जटाकन्हार के प्राथमिक शाला में लगभग 80 की दर्ज संख्या वाले स्कूल में पढ़ाई के लिए स्वयं का भवन ही नहीं है। दो अतिरिक्त कक्ष में ही पहली से पांचवीं तक के बच्चों की पढ़ाई होती है। सन 1964 से यहां प्राथमिक शाला का संचालन हो रहा है। पहले जो भवन था, वह जर्जर हो चुका था, इसलिए उसे तोड़ दिया गया है और अतिरिक्त कक्ष को बनाया गया। एक अतिरिक्त कक्ष को 2005 में बनाया गया तथा एक अतिरिक्त कक्ष का निर्माण 2007 में किया गया है। वहीं प्रधान पाठक कक्ष को 2012 में बनाया गया है। उसमें भी जगह की कमी होने के कारण प्रधान पाठक कक्ष में बच्चों को बिठाकर पढ़ाया जाता है। यहां पर कमरों के हिसाब से बच्चों की संख्या अधिक हो रही है और कक्ष कम पड़ रहे हैं। इसके अलावा यहां पहली से पांचवी तक के लिए केवल दो ही शिक्षक, जिसमें प्रधान पाठक के रूप में हेमंत कुमार तथा एक शिक्षक केदारनाथ प्रधान पदस्थ हैं। दर्ज संख्या के हिसाब से शिक्षक की भी कमी बनी हुई है। अगर एक और शिक्षक नियुक्त हो जाता तो पढ़ाई सुचारू रूप से संचालन हो जाएगा।
























