महासमुंद : मूर्तिकारों के चेहरे खिल उठे 2 साल बाद मिला भरपूर ऑर्डर

इस साल कोरोना का गाइडलाइन नहीं होने से मूर्तिकारों के चेहरे खिल उठे है क्योंकि उन्हें उम्मीद से ज्यादा आर्डर मिल रहे है। इस बार गाइडलाइन नहीं होने के कारण शहर सहित ग्रामीण इलाकों में गणेश जी की प्रतिमा विराजित हो रही है। यही कारण है कि आर्डर ज्यादा मिले है। वहीं मूर्तिकारों को समय पर डिलीवरी भी करना है। इसलिए इस निर्माण में उनका परिवार भी जुटा हुआ है। इधर, शहर के कुम्हारपारा में लगभग सभी मूर्तिकारों के घरों में प्रतिमा निर्माण जारी है।पिछले दो सालों से कोरोना संक्रमण के चलते रायपुर-दुर्ग और भिलाई के व्यापारियों से शहर के मूर्तिकारों को प्रति वर्ष मिलने वाला आर्डर आधे से भी कम हो गया था। जिससे मूर्तिकार की आर्थिक स्थिति पर इसका असर पड़ा था। लेकिन पिछले वर्ष से कोरोना संक्रमण के कमजोर होने के बाद से गणेश चतुर्थी पर प्रतिमा निर्माण की मांग बढऩे लगी है। जिसका असर है कि इस वर्ष बड़ी संख्या में व्यापारियों ने प्रतिमा निर्माण के लिए आर्डर दिया है। ज्ञात हो कि गणेश चतुर्थी आगामी 31 अगस्त को है जिसे करीब पखवाड़ेभर का समय ही शेष रह गया है इससे पूर्व प्रतिमा को अंतिम रुप देने में मूर्तिकार परिवार समेत जुटे हैं।
महंगाई के कारण प्रतिमा की कीमत 25 फीसदी तक बढ़ी
मूर्तिकारों ने बताया कि इस बार मिट्टी के अलावा रंग-रोगन और लकड़ी के दाम में इजाफा हुआ है। प्रतिमा के दामों पर इसका असर देखने को मिलेगा। जो दो फीट तक की प्रतिमा पहले दो सौ रुपए तक मिलती थी उनकी कीमत में 50 रुपए की वृद्धि की गई है। बड़ी प्रतिमाओं के दाम में भी 5 सौ से 1 हजार रुपए तक की वृद्धि की गई है।
300 प्रतिमाओं का ऑर्डर
कुम्हारपारा के मूर्तिकार राजेश चक्रधारी ने बताया कि 2020 में उन्हें कोविड की वजह से रायपुर-दुर्ग के व्यापारियों से मिलने वाला आर्डर नहीं मिल पाया। दो वर्ष से आर्डर आधे से भी कम मिल रहा था। इस बार 300 प्रतिमाओं का आर्डर मिला है। 25 अगस्त तक व्यापारियों ने प्रतिमा देने के लिए कहा है। बाहर के अलावा स्थानीय बाजार के लिए भी प्रतिमा तैयार हो रही है।






















