स्व. हरिवंश मिश्र राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह में देशभर के शिक्षकों का सम्मान

सरायपाली। शिक्षा को राष्ट्र की प्रगति की आधारशिला बताते हुए राष्ट्रीय शिक्षा अंजोर भारत परिवार द्वारा नगर निगम सभागार रायगढ़ में स्व. हरिवंश मिश्र राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में देश के विभिन्न राज्यों एवं छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों से पहुंचे शिक्षकों को शिक्षा के क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट, नवाचारी एवं सराहनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां भारती, मां सरस्वती एवं छत्तीसगढ़ महतारी के पूजन-अर्चन और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इसके बाद अतिथियों ने स्व. हरिवंश मिश्र के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में आयोजित शैक्षिक संगोष्ठी में शिक्षकों ने विद्यालयों में किए जा रहे विभिन्न नवाचारों एवं शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के प्रयासों पर प्रकाश डाला। देशभर से आए शिक्षकों ने शिक्षा के क्षेत्र में गुणोत्तर वृद्धि के लिए विचार-विमर्श किया।
समारोह में शिक्षकों ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी अपनी प्रतिबद्धता जताई। राष्ट्रीय शिक्षा अंजोर भारत परिवार की ओर से प्रत्येक शिक्षक को दो पौधे लगाने और उनकी देखरेख करने का संकल्प दिलाया गया। इनमें एक पौधा स्व. हरिवंश मिश्र की स्मृति में तथा दूसरा पौधा अपने माता-पिता या पूर्वजों के नाम पर लगाने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री जगन्नाथ पाणिग्राही, इंडिपेंडेंट डायरेक्टर, ब्रेथवेट बर्न एंड जेसप कंस्ट्रक्शन कंपनी (बीबीजे), भारी उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता एनआर स्टील रायगढ़ के संस्थापक एवं शिक्षाविद संजय अग्रवाल ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में शिक्षाविद गुणनिधि सतपथी एवं राष्ट्रीय शिक्षा अंजोर भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पूर्णानंद मिश्रा उपस्थित रहे।
डॉ. पूर्णानंद मिश्रा ने संस्था की ओर से शिक्षा, पर्यावरण एवं सामाजिक क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्था द्वारा पूर्व में बसना, सरायपाली एवं रायपुर में भी ऐसे आयोजन किए जा चुके हैं और रायगढ़ में आयोजित यह चौथा कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मान समारोह शिक्षकों एवं समाजसेवियों को बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं।
मुख्य अतिथि जगन्नाथ पाणिग्राही ने कहा कि जिस समाज में शिक्षक का सम्मान होता है, वहां ज्ञान का प्रकाश कभी कम नहीं होता। उन्होंने गुरु परंपरा और वर्तमान समय में शिक्षक की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षक का सम्मान केवल समारोह तक सीमित न रहकर हमारे व्यवहार और संस्कार का हिस्सा बनना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संजय अग्रवाल ने कहा कि मूर्ति इसलिए वंदनीय नहीं होती कि उसमें भगवान का वास है, बल्कि इसलिए कि उसने तराशे जाने का दर्द सहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा अंजोर भारत का यह मंच ऐसे ही शिक्षकों को सम्मानित कर रहा है, जिन्होंने स्वयं को तराशने के साथ समाज के अनेक लोगों के जीवन को भी दिशा दी है।
विशिष्ट अतिथि गुणनिधि सतपथी ने कहा कि प्राचीन भारत में गुरु को समाज में अग्रणी स्थान प्राप्त था। शिक्षा ही मनुष्य और पशु के बीच सबसे बड़ा अंतर है और शिक्षा का दान करने वाले गुरु समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सम्मानित शिक्षकों से समाज सेवा एवं राष्ट्र निर्माण में निरंतर योगदान देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में अपूर्वा डड़सेना ने मनमोहक कत्थक नृत्य की प्रस्तुति देकर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। समारोह में अजय कुमार जायसवाल, उस्ताद अली, रामकुमार मैत्री, आनंद शर्मा, डीजेन्द्र कुर्रे, डॉ. प्रज्ञा सिंह, गायत्री मिश्रा, जितेन्द्र मिश्रा, मातली नंदन वर्मा, मनोज मुंच्छावड़, मीनाक्षी शर्मा, मोहन लहरी, पीताम्बर मानिकपुरी, प्रेमचंद साव, पूनम सिंह साहू, रिंकल बग्गा, रीता पति, रोहित शर्मा, रूद्र नारायण तिवारी, शैलेन्द्र नायक, शैलेश प्रजापति, तरुण दास, आशा उज्जैनी, उर्मिला मिश्रा सहित अनेक लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
प्रथम सत्र का संचालन जिला संयोजक भूपेश पंडा, द्वितीय सत्र का संचालन व्याख्याता श्रीमती विजया पंडा ने किया। आभार प्रदर्शन जिलाध्यक्ष विकास रंजन सिन्हा ने किया।





























