पुलिस द्वारा बर्बरतापूर्वक मारपीट से पिथौरा के वकील आक्रोशित हुए.. कार्यवाही नही होने पर करेंगे चुनाव बहिष्कार..

एसडीएम को हटाने व मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों के निलंबन की मांग की गई
काकाखबरीलाल, पिथौरा । अधिवक्ता के विरुद्ध पुलिस अभिरक्षा में की गई बर्बरता पूर्वक मारपीट व विधि विरुद्ध ढंग से जेल भेजने को लेकर पिथौरा के अधिवक्ता आक्रोशित हैं। अधिवक्ता संघ ने रविवार को आपात बैठक आयोजित कर पुलिस की बर्बरता पूर्वक की गई कार्यवाही की कड़ी निंदा की है। साथ ही एसडीएम के द्वारा जमानतीय प्रकृति के अपराध में एक अधिवक्ता को जेल भेजने के विरुद्ध एसडीएम व पुलिस के विरुद्ध कार्यवाही को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया है।

मिली जानकारी के अनुसार ग्राम कोचर्रा निवासी गौरी शंकर पटेल जो कि पेशे से वकील हैं उनके विरुद्ध थाना पिथौरा में दर्ज पुराने मामलों को लेकर पिथौरा पुलिस ने उन्हें उस समय गिफ्तार कर लिया था जब वे न्यायालीन कार्यवाही संपादित कर के घर लौट रहे थे। धारा 110 जाफो के तहत प्रकरण तैयार करते हुए शनिवार की शाम एसडीएम न्यायालय में पेश किया गया था। उनकी ओर से पिथौरा के सभी अधिवक्ता पैरवी करने के लिए पहुंचे थे। और सक्षम जमानत भी पेश कर रहे थे। किंतु एसडीएम बीसी एक्का के द्वारा जमानत का लाभ ना देते हुए गौरी शंकर पटेल को जेल भेज दिया गया। जबकि वकीलों का कहना है कि जमानतीय अपराध में बिना जमानत के सिर्फ मुचलका में रिहा किये जाने का प्रावधान है।
पुलिस के ऊपर मारपीट का है आरोप
न्यायालय में गौरी शंकर पटेल ने आवेदन देकर एसडीएम से निवेदन किया था कि उनके साथ पुलिस वालों ने मारपीट किया है।जिस पर कार्रवाई की मांग की गई थी। मेडिकल मुलाहिजा कराने पर 22 जगह चोटों के निशान भी पाए गए थे। रात्रि में चिकिस्कीय उपचार हुआ है।

तत्काल कार्यवाही नही होने पर चुनाव का बहिष्कार करेंगे वकील
समग्र परिस्थितियों को देखते हुए पिथौरा के वकीलों ने रविवार को आपात बैठक रखी और पुलिस प्रशासन तथा एसडीएम के विरुद्ध प्रस्ताव पारित किया गया।तथा एक स्वर से निर्णय लिया गया है कि दिनांक 29 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक पिथौरा के अधिवक्ता किसी भी न्यायालय की कार्यवाही में भाग नहीं लेंगे। साथ ही एसडीएम का तबादला जब तक नहीं हो जाता है तब तक कोई भी अधिवक्ता राजस्व एवं दाण्डिक प्रकृति की कार्यवाही में एसडीएम न्यायालय में भाग नहीं लेंगे। साथ ही सम्पूर्ण मामले की जांच की उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है। व दोषी कर्मचारियों को तत्काल निलंबन की मांग भी की गई है। अधिवक्ता संघ की मांगो पर जल्द ही ध्यान नहीं दिया जाता है तो 20 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया है।

























