महासमुंद : सभी पैकेट पर एमआरपी संग होगा यूनिट प्राइस

ग्राहकों को से ठगना मुश्किल होगा, क्योंकि सभी खाद्य उत्पादों के निर्माताओं को पैकेट बंद उत्पादों के प्रति यूनिट यानी ग्राम व नग के हिसाब से कीमत प्रिंट कराना होगा। यानी अब पैकेट ग्राम, किलाेग्राम, लीटर ही नहीं सेंटीमीटर और मीटर में बिकने वाली हर सामग्री की पैकिंग में एमआरपी के साथ यूनिट प्राइस लिखा होगा।

इतना ही नहीं संख्या यानी पीस हिसाब से बेची जा रही सामग्री की पैकिंग में भी प्रति नग कीमत अंकित होगा। ये सभी पैकेट में अंकित हाेना अनिवार्य है। यह नए नियम शनिवार से लागू होंगे।खाद्य उपभोक्ता मंत्रालय ने लीगर मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमाडिटीज) नियम 2011 में संशोधन किया है। नए नियम के तहत अब पैकेज्ड उत्पादों पर दो तरह के दाम लिखना अनिवार्य होगा। अगर किसी पैके में 1 किलो या 1 लीटर से कम सामान पैक किया गया है तो उस पर प्रति ग्राम या प्रति मिलीलीटर के हिसाब से रेट लिखना पड़ेगा। नए नियम के तहत पैकेट बंद वस्तु में भी 1 ग्राम की भी चोरी करना मुश्किल होगा, हालांकि ये नियम 1 अक्टूबर से लागू होंगे, लेकिन वर्तमान में पुराने पैकेट मार्केट में है। इसे खपाने में करीब दो से तीन माह लग जाएंगे। नए पैकेट में यदि ऐसा लिखा नहीं होगा तो नाप तौल विभाग कार्रवाई करेगा।
इस संबंध में नापतौल विभाग के इंस्पेक्टर सिद्धार्थ दुबे का कहना है कि शासन के निर्देश के बाद अब 1 अक्टूबर से पैकेज्ड उत्पादों पर बदलाव किया गया है। नियम उपभोक्ताओं के फायदा के लिए है। कई उत्पादों के एक किलो के पैकेट में 900 ग्राम का सामान रहता है, लेकिन उसकी एमआरपी प्रति किलो की दर से जुड़ी रहती है, लेकिन नए नियम के अनुसार पैकेटों में एमआरपी के अलावा प्रति ग्राम की कीमत भी लिखा होगा, जिससे उपभोक्ता आसानी से पैकेट में रखे सामानों का अंदाजा लगा पाएंगे।
नुकसान से बचाने यूनिट प्राइस की जरूरत पड़ी
संशोधन के पूर्व कई जांच और कार्रवाई के बावजूद वजन में गड़बड़ी, सेंटीमीटर या मीटर में बिकने वाली सामग्रियां, उपयोग के दौरान कम मिलती है। इसी तरह पीस में आने व बिकने वाली पैकिंग में भी संख्या कम मिलने की भी शिकायत आती रही है। कीमत के तुलनात्मक अध्ययन में उपभोक्ताओं को इस नुकसान का पता चलता रहा है। नए नियम से उपभोक्ताओं के हितों के साथ खिलवाड़ को भी रोका जा सकेगा।























