छत्तीसगढ़

निजी डबरी से दोहरा लाभ ले रहे संतोष

आम के आम, गुठलियों के दाम, यह कहावत पूरी तरह से चरितार्थ हो रही है, बाजार कुर्रीडीह के सीमांत कृषक श्री संतोष ध्रुव पर। दरअसल श्री संतोष का बाजार कुर्रीडीह (नगरी) में दो एकड़ कृषि भूमि है। वे यहां अक्सर धान की फसल लगाते हैं। लेकिन सिंचाई के लिए मानसून की बारिश पर वे निर्भर थे। ऐसे में उन्होंने अपनी कृषि भूमि में निजी डबरी की मांग ग्रामसभा में रखी। जिसका प्रस्ताव स्वीकृत कर मनरेगा से निजी डबरी बनाने का फैसला लिया गया। फलस्वरूप वित्तीय वर्ष 2020-21 में छः मई 2020 से उनकी भूमि में निजी डबरी निर्माण शुरू किया गया, जो कि 11 जून तक चला। इस निजी डबरी के बन जाने से संतोष को काफी लाभ पहुंचा, क्यांकि अब उनके डबरी में हमेशा पानी भरा रहता है। वे इस डबरी से जहां खेतों की सिंचाई कर रहे, वहीं दूसरी ओर डबरी में मछलीपालन की गतिविधि भी शुरू कर दिए हैं। उन्होंने 30 किलो मछली बीज डबरी में डालकर उसका सही तरीके से देखभाल किया। इनमें रूहा, कतला, कामन, तेलबिया मछली सम्मिलित है। नतीजन उन्हें मत्स्यपालन से शुद्ध 23 हजार रूपए का मुनाफा हुआ। यह मुनाफा उनके मछली बीज और मत्स्य आहार में हुए 7 से 10 हजार रूपए के व्यय से अलग है।
श्री ध्रुव खुश हैं कि उनकीं निजी भूमि में डबरी निर्माण हुआ। इससे जहां उनके खेतों में सिंचाई सुविधा मुहैय्या हुई, वहीं डबरी में मत्स्य पालन भी उनके लिए आय का एक जरिया बनकर उभरा। ज्ञात हो कि मनरेगा से उक्त डबरी निर्माण के लिए एक लाख 28 हजार रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई। इससे 112 श्रमिकों को मजदूरी के रूप में 602 मानव दिवस के लिए एक लाख 15 हजार मिले, वहीं सामग्री में 13 हजार रूपए व्यय हुए। इस तरह जहां मनरेगा में श्रमिकों को मजदूरी मिली, गांव में परिसम्पत्ति निर्माण हुआ, वहीं हितग्राही श्री संतोष को भी सिंचाई के साथ मत्स्यपालन से आय में वृद्धि हुई। उनकी आर्थिक स्थिति को सृदृढ़ करने डबरी की अहम भूमिका है।

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छत्तरसिंग पटेल

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